राँची : लोकतंत्र के पहरेदारों ने लोकतंत्र को कलंकित होने से बचा लिया। 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने की बजाय उसमें संशोधन के नाम पर परिसीमन विधेयक को पारित कराना सरकार की प्राथमिकता सूची में था।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को धोखा देना चाहती है। अगर सरकार की मंशा साफ होती तो वर्तमान 543 सीटों पर ही 2024 के चुनाव में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर सकती थी जिससे लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 180 हो जाती, लेकिन भाजपा की नियत में खोट है। 2023 के विधेयक में पहले जनगणना फिर परिसीमन और महिला आरक्षण 2029 में लागू करने का विधेयक सरकार द्वारा लाया गया जिसे कांग्रेस समेत विपक्ष ने पूरी तरह से समर्थन दिया था आखिर क्या कारण है कि हड़बड़ी में पुनः बिल लाया गया इस पर बाबूलाल मरांडी जी को जवाब देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी लाख चाहे लेकिन महिलाएं भाजपा के झांसे में नही आयेंगी। 131 वें संविधान संशोधन विधेयक का पारित न होना लोकतंत्र की बड़ी जीत है। भारत के संघीय ढाँचे को बदलने और लोकतंत्र को कमजोर करने की सरकार की साजिश नाकाम हो गयी। महिलाओं की भावनाओं का इस्तेमाल करके स्थायी रूप से सत्ता में बने रहने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फूल प्रूफ योजना धाराशायी हो गयी। इस विधेयक गिरने के साथ हीं विपक्ष को महिला विरोधी बताने की कोशिश करने की भाजपा की कोशिशों पर पूर्ण विराम लग गया क्योंकि देश की आधी आबादी जानती है कि वोट की खातिर भाजपा उन्हें इस्तेमाल करना चाहती है जबकि महिलाओं के अधिकारों की हितरक्षक कांग्रेस ही हैं। महिलाओं को सत्ता में सीधी भागीदारी में देने के लिये संकल्पित कांग्रेस ने 74वें संविधान संशोधन द्वारा निकायों में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया जिसके कारण आज 15 लाख से अधिक महिलाएं निकायों में चुनकर सत्ता व्यवस्था संभाल रही हैं। महिलाओं के अधिकारों से खिलवाड़ भाजपा को आगे आने वाले समय में महंगा पड़ेगा। महिलाओं की भावनाओं को हथियार बनाकर भाजपा जिस तरह की विकृत राजनीति करना चाहती है उसमें उसे मुंह की खानी पड़ेगी।













