रांची :झारखंड आज संसद में प्रस्तुत किए गए महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस का रुख पूरी तरह स्पष्ट, जिम्मेदार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वाला रहा। कांग्रेस पार्टी महिला सशक्तिकरण की हमेशा से प्रबल समर्थक रही है और आज भी हम महिलाओं को राजनीति में समुचित प्रतिनिधित्व देने के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं।प्रदेश कांग्रेस महासचिव सह मिडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा की लेकिन जिस तरीके से केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण विषय को प्रस्तुत किया है, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक घोषणा या चुनावी रणनीति का हिस्सा नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाना चाहिए। यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है, तो उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह आरक्षण बिना किसी अनावश्यक शर्तों और देरी के लागू हो। दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से जोड़कर इसके क्रियान्वयन को अनिश्चित बना दिया है।
परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस ने संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। हमारा मानना है कि परिसीमन की प्रक्रिया को जिस प्रकार से प्रस्तुत किया जा रहा है, वह देश के संघीय ढांचे को कमजोर कर सकता है और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन को बिगाड़ सकता है। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर लोकतंत्र की संरचना और जनता के अधिकारों पर पड़ता है। इसलिए इस पर व्यापक चर्चा, सभी पक्षों की सहमति और पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
आज सदन में कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार क्यों महत्वपूर्ण विधेयकों को बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के जल्दबाजी में लाने का प्रयास कर रही है। लोकतंत्र में संवाद, सहमति और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन सर्वोपरि होता है। लेकिन वर्तमान सरकार इन मूल्यों को दरकिनार कर अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दे रही है, जो चिंताजनक है।
कांग्रेस पार्टी यह स्पष्ट करना चाहती है कि हम किसी भी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेंगे जो संविधान की भावना, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता हो। हम महिलाओं के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसके नाम पर देश की राजनीतिक संरचना के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
अंततः, कांग्रेस सरकार से यह मांग करती है कि महिला आरक्षण को तुरंत और स्वतंत्र रूप से लागू किया जाए तथा परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों और राज्यों के साथ व्यापक चर्चा कर सर्वसम्मति बनाई जाए। यही लोकतंत्र की असली भावना है और यही देशहित में सही रास्ता है।












