रांची /झारखंड :रांची विमेंस कॉलेज ने एक बार पुनः यह सिद्ध किया है कि वह केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, मानवीय मूल्यों और प्रगतिशील दृष्टि का सशक्त केंद्र है। इसी क्रम में (NHRC) के विशेष मॉनिटर प्रो. कन्हैया त्रिपाठी तथा उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल एवं रांची विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के तौर पर डॉ स्मृति सिंह का महाविद्यालय में गरिमामय आगमन हुआ। यह अवसर केवल निरीक्षण तक सीमित न रहकर संस्थान में संचालित विविध गतिविधियों के मूल्यांकन और उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु सार्थक संवाद का माध्यम बना।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. विनीता सिंह, IQAC टीम, प्राध्यापकगण तथा विभिन्न समितियों के सदस्यों ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत करते हुए संस्थान की बहुआयामी उपलब्धियों एवं सतत प्रगतिशील प्रयासों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। इस संवाद से यह स्पष्ट रूप से प्रतिपादित हुआ कि रांची विमेंस कॉलेज न केवल अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में अग्रसर है, बल्कि सामाजिक सरोकारों, मानवाधिकार चेतना तथा लैंगिक समानता जैसे विषयों पर भी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है।
दौरे के दौरान विशेष मॉनिटर द्वारा महाविद्यालय की विविध गतिविधियों एवं पहलों का अवलोकन किया गया, जिनमें छात्र-हित, समावेशी शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और संस्थागत पारदर्शिता प्रमुख रूप से परिलक्षित हुई। विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु नियमित कार्यक्रम, छात्राओं के लिए सुरक्षित एवं सहयोगात्मक वातावरण तथा शैक्षणिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के संतुलित संचालन जैसी बेस्ट प्रैक्टिसेज की सराहना की गई। विशेष रूप से शारीरिक रूप से अक्षम विद्यार्थियों के लिए विकसित संवेदनशील एवं समावेशी व्यवस्थाओं को एक अनुकरणीय पहल के रूप में रेखांकित किया गया।
प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महाविद्यालय ने शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर उसे जीवन-मूल्यों से जोड़ने का जो प्रयास किया है, वह अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मानवाधिकार, लैंगिक समानता और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति महाविद्यालय की प्रतिबद्धता इसे एक आदर्श संस्थान के रूप में प्रतिष्ठित करती है।
इसी संदर्भ में उन्होंने महाविद्यालय में एक सशक्त और औपचारिक ह्यूमन राइट्स सेल के गठन का सुझाव दिया, ताकि पूर्व से संचालित गतिविधियों को और अधिक संरचित तथा प्रभावी रूप प्रदान किया जा सके। साथ ही, संस्थान में हो रहे उत्कृष्ट कार्यों के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इससे इन पहलों को व्यापक स्तर पर साझा किया जा सकेगा और अन्य संस्थानों के लिए प्रेरणा का स्रोत निर्मित होगा।
लैंगिक समानता के क्षेत्र में महाविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने नियमित जेंडर सेंसिटाइजेशन कार्यक्रमों, कार्यशालाओं एवं संवाद सत्रों के आयोजन को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता व्यक्त की। मानवाधिकार विषयक बौद्धिक विमर्श को विस्तार देने हेतु एक समर्पित पत्रिका प्रारंभ करने अथवा महाविद्यालय पत्रिका में इस विषय को प्रमुखता से स्थान देने का सुझाव भी दिया गया।
पर्यावरण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में महाविद्यालय की सक्रियता को देखते हुए ह्यूमन राइट्स गार्डन/क्लब की स्थापना का प्रस्ताव भी अत्यंत सार्थक माना गया, जिससे विद्यार्थियों में संवेदनशीलता और सहभागिता की भावना और अधिक विकसित हो सके। समसामयिक चुनौतियों के संदर्भ में डिजिटल सुरक्षा, साइबर अपराध और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर भी बल दिया गया।
महाविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को सहेजने हेतु संस्थापक प्राचार्या के नाम पर एक प्रतिष्ठित ‘भानुमति पुरस्कार’ प्रारंभ करने का सुझाव प्रेरणादायक रहा। भारत की प्रथम महिला कुलपति प्रोफेसर हंसा मेहता की तस्वीर प्राचार्या कार्यालय में लगाने की बात भी कही गई ।
इसके साथ ही “समान कार्य के लिए समान वेतन” (Equal Pay for Equal Work) के मुद्दे को भी शिक्षकों द्वारा गंभीरता से उठाया गया। वोकेशनल एवं बी.एड. संकाय के शिक्षकों ने इस असमानता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वेतन संरचना में अंतर को संतुलित किया जाना आवश्यक है, ताकि कार्य के अनुरूप समान पारिश्रमिक सुनिश्चित हो सके।
छात्रावास की व्यवस्थाओं के संदर्भ में यह पाया गया कि महाविद्यालय छात्राओं के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के प्रति निरंतर सजग है। सीसीटीवी व्यवस्था, गार्डन, कॉमन रूम तथा ग्रीवांस तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने के सुझाव भी दिए गए। महाविद्यालय का पुस्तकालय पहले से ही डिजिटल स्वरूप में विकसित है, जिसे और अधिक समृद्ध बनाने हेतु नवीन तकनीकों एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल संसाधनों को जोड़ने की अनुशंसा की गई।
इसके अतिरिक्त, ग्रीवांस सेल, काउंसलिंग, प्लेसमेंट एवं प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में महाविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई। यह स्पष्ट हुआ कि संस्थान विद्यार्थियों के समग्र विकास—शैक्षणिक, मानसिक, भावनात्मक एवं व्यावसायिक—के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
प्राचार्या डॉ. विनीता सिंह ने इस अवसर पर कहा कि महाविद्यालय सदैव शिक्षा को सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जोड़कर देखने में विश्वास करता है और विशेष मॉनिटर द्वारा दिए गए सुझावों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा, जिससे संस्थान की कार्यप्रणाली और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बन सके।
यह दौरा रांची विमेंस कॉलेज के लिए एक प्रेरणादायक अवसर सिद्ध हुआ, जिसने न केवल वर्तमान उपलब्धियों की सराहना की, बल्कि भविष्य की दिशा भी स्पष्ट की। महाविद्यालय अपने समर्पण, संवेदनशीलता और प्रगतिशील दृष्टिकोण के साथ शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर नए आयाम स्थापित करने हेतु प्रतिबद्ध है।













