रांची :प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार लगातार देश की जनता पर आर्थिक बोझ डालने के बाद अब लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी “त्याग” का उपदेश दे रही है। प्रदेश कांग्रेस क़े मिडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने तंज कसते हुए कहा की देश में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता चरम पर है, तब जनता को यह कहना कि “सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाने का तेल कम करो” बेहद असंवेदनशील और जनविरोधी सोच को दर्शाता है।
कांग्रेस का सवाल है कि आखिर देश की जनता कब तक हर आर्थिक विफलता की कीमत चुकाती रहेगी? क्या मध्यम वर्ग और गरीब परिवार अपनी इच्छाओं, जरूरतों और जीवन स्तर को लगातार कम करते रहें, जबकि सरकार अपने प्रचार और बड़े-बड़े आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च करती रहे?
आज स्थिति यह है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। खाने के तेल से लेकर दाल, सब्जी और गैस सिलेंडर तक सब महंगे हो चुके हैं। ऐसे में जनता को राहत देने के बजाय उनसे “कम इस्तेमाल” करने की सलाह देना सरकार की विफलता को छिपाने की कोशिश है।
कांग्रेस का मानना है कि सरकार का काम लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाना, रोजगार पैदा करना और महंगाई नियंत्रित करना होता है, न कि जनता की जरूरतों और सपनों को सीमित करने की नसीहत देना। अगर लोग सोना नहीं खरीदेंगे, यात्रा नहीं करेंगे और बाजार में खर्च नहीं करेंगे तो अर्थव्यवस्था कैसे मजबूत होगी?
देश की जनता त्याग नहीं, जवाब चाहती है — आखिर 12 वर्षों के शासन के बाद भी महंगाई और आर्थिक संकट से राहत क्यों नहीं मिली? मोदी सरकार को उपदेश देने के बजाय जनता को राहत देने की दिशा में काम करना चाहिए।













