रांची : झारखंड के प्रमुख केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने चार लेबर कोड को राज्य में लागू किए जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मजदूरों पर हो रही कथित बर्बरतापूर्ण कार्रवाई और अधिकारों के हनन के विरोध में 18 अप्रैल को राजधानी रांची में विशाल एकजुटता रैली निकाली जाएगी।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य कार्यालय में एटक, इंटक, सीटू और एक्टू की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता एटक के महासचिव अशोक यादव ने की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि देशभर में चल रहे स्वत:स्फूर्त मजदूर आंदोलनों के साथ एकजुटता दिखाई जाएगी और झारखंड सरकार पर चारों श्रम संहिताओं को लागू न करने का दबाव बनाया जाएगा।
देशव्यापी आंदोलन से जुड़ाव
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि गुड़गांव-मानेसर, नोएडा, फरीदाबाद, भिवाड़ी और पानीपत सहित देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से लाखों मजदूर सड़कों पर हैं। इनकी बुनियादी मांगें बेहद स्पष्ट हैं — उचित वेतन, आठ घंटे का कार्यदिवस, सामाजिक सुरक्षा और कानूनन प्राप्त अधिकारों की गारंटी। नेताओं ने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन किसी बाहरी राजनीतिक उकसावे की उपज नहीं है, बल्कि सालों से जारी शोषण, उपेक्षा, वादाखिलाफी और कॉरपोरेट पक्षधर नीतियों का स्वाभाविक परिणाम है।
मजदूरों के हालात बदतर
संगठनों ने गुड़गांव-मानेसर-नोएडा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां ठेका और स्थायी दोनों तरह के मजदूर मात्र 10-11 हजार रुपये मासिक वेतन पर 8 से 13 घंटे तक काम करने को मजबूर हैं। न साप्ताहिक अवकाश मिलता है, न ओवरटाइम का भुगतान। फैक्ट्री कैंटीन में घटिया खाना दिया जाता है और कार्यस्थल पर कदम-कदम पर अपमान व धमकी का सामना करना पड़ता है। यूनियन बनाने की कोशिश करने पर नौकरी से निकाल दिया जाता है।
महंगाई और वैश्विक संकट की दोहरी मार
नेताओं ने कहा कि पहले से ही भयंकर महंगाई ने मजदूरों की कमर तोड़ रखी है। 10-12 हजार रुपये के वेतन में परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और इलाज असंभव हो गया है। हाल ही में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल व गैस की किल्लत हो गई है। इसके चलते घरेलू गैस, पेट्रोल-डीजल और परिवहन के दाम बेतहाशा बढ़े हैं, जिसका सीधा असर मजदूरों की रसोई और आवाजाही पर पड़ा है। ऐसे में चार लेबर कोड लागू करना मजदूरों को पूरी तरह कॉरपोरेट के रहमो-करम पर छोड़ देना होगा।
चार लेबर कोड पर आपत्ति
श्रमिक संगठनों का कहना है कि वेज कोड, औद्योगिक संबंध कोड, सामाजिक सुरक्षा कोड और व्यावसायिक सुरक्षा कोड मालिकों के पक्ष में हैं। इनसे ‘हायर एंड फायर’ आसान होगा, काम के घंटे 12 तक बढ़ाए जा सकेंगे, यूनियन बनाना कठिन होगा और ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा। इसलिए झारखंड सरकार से मांग की गई है कि वह इन कोड को राज्य में अधिसूचित न करे।
18 अप्रैल की तैयारी
18 अप्रैल की रैली में रांची के अलावा बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, हजारीबाग और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से हजारों मजदूरों के जुटने की उम्मीद है। रैली के बाद राजभवन मार्च कर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठनों ने सभी प्रगतिशील, जनवादी ताकतों से रैली को समर्थन देने की अपील की है इस बैठक में सीपीआई के महेंद्र पाठक,अजय सिंह,गणेश महतो,इंटक के लीलाधर सिंह, सीटू के अनिर्वाण,मुंद्रिका सिंह, एक्टू के शिवेंदु सेन अजय चौधरी,मुख्य रूप से उपस्थित थे।












