रांची : झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पावन भूमि पर राष्ट्रपति का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ। बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) मेसरा के प्लेटिनियम जुबली समारोह के अवसर पर अपनी गरिमामयी उपस्थिति प्रदान करने हेतु इस संस्थान के कुलाधिपति के रूप में राष्ट्रपति का आभार प्रकट करता हूँ।
राष्ट्रपति बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) मेसरा के इस ऐतिहासिक प्लेटिनम जुबली समारोह में आपका आगमन न केवल इस प्रतिष्ठित संस्थान के लिए, बल्कि सम्पूर्ण शिक्षा जगत के लिए सौभाग्य का विषय है। जब से आपके झारखण्ड आगमन की सूचना मिली है, तब से राज्यवासियों में उत्साह एवं हर्ष का माहौल है। आपने 6 वर्षों से अधिक झारखण्ड के राज्यपाल के पद को सुशोभित किया और ‘पीपुल्स गवर्नर’ के रूप में आपकी कार्यशैली और जनसेवा की भावना ने झारखंड के जनमानस में गहरी छाप छोड़ी है।
मुझे यह कहते हुए हर्ष हो रहा है कि बीआईटी मेसरा इस देश में कई इंजीनियरिंग विषयों और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की समृद्ध विरासत के साथ एक प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी संस्थान है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नए आयामों के उदय के साथ, यह अपने कुशल युवा इंजीनियरों और प्रबंधकों के लिए नई संभावनाएँ प्रस्तुत कर रहा है।
1955 में बीआईटी मेसरा की स्थापना इस संस्थान के दूरदर्शी संस्थापक बी० एम० बिड़ला जी की एक बहुत ही प्रशंसनीय पहल थी, जिन्होंने इस देश के विकास के लिए इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के महत्व को सही ढंग से समझा।
तब से, बीआईटी ने एक लंबा सफर तय किया है और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को तैयार किया है, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी योग्यता से संस्थान और देश का नाम रोशन किया है। यह संस्थान निरंतर नये नवाचारों और अनुसंधान में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जो इसे विश्वस्तर पर विशिष्ट बनाता है।
मुझे अत्यधिक हर्ष है कि बी.आई.टी. मेसरा ने विद्यार्थियों की सोच को विकसित किया है और उन्हें एक ऐसे भविष्य के लिए तैयार किया है जो उनके जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने तथा उनके समाधान ढूंढने की शक्ति प्रदान करती है। तेजी से बदलते समय में, जब प्रतिदिन नई तकनीकें, चुनौतियाँ और अवसर उत्पन्न हो रहे हैं, तो युवाओं के पास वह विज़न और क्षमता होनी चाहिए जो उन्हें अपनी राह पर अडिग रखे और समाज के उत्थान में योगदान दे सके। मुझे विश्वास है कि हमारे विद्यार्थी जो भी ज्ञान और मूल्य यहाँ अर्जित कर रहे हैं, वह देश की प्रगति में योगदान देगा।
इस अवसर पर, मैं विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूँगा कि राष्ट्रपति नारी शिक्षा की प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने विषम परिस्थिति में भी उच्च शिक्षा ग्रहण किया। अपने कार्यकाल के दौरान बालिका शिक्षा और सशक्तिकरण हेतु उन्होंने राज्य में स्थित विभिन्न कस्तूरबा गाँधी बालिका आवासीय विद्यालय का भ्रमण किया। उनकी प्रेरणा से देश की लाखों बेटियाँ पढ़ने हेतु आगे बढ़ रही हैं। विभिन्न दीक्षांत समारोहों में देखा जा रहा है कि हमारी छात्राएँ, छात्रों की तुलना में अधिक स्वर्ण पदक प्राप्त कर रही हैं। यह दर्शाता है कि जब अवसर मिलता है, तो बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहतीं। यह नए भारत की तस्वीर है।
बीआईटी मेसरा न केवल इंजीनियरिंग और प्रबंधन में बल्कि सामाजिक समावेशिता की दिशा में भी कार्य कर रहा है। यहाँ संचालित पॉलिटेक्निक संस्थान विशेष रूप से आदिम जनजातियों सहित आरक्षित श्रेणियों के छात्रों को तकनीकी शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान कर रहा है, जो रोजगार और उद्यमिता के बेहतर अवसर की दिशा में सहायक हैं।
प्रधानमंत्री जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को साकार करने में बीआईटी मेसरा का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैं बीआईटी के संकाय सदस्यों और विद्वानों से आह्वान करता हूँ कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का निर्वहन करें और इस देश की आम जनता और उद्योगों के लाभ के लिए नए इंजीनियरिंग मॉडल, उपकरण, मशीनें और सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनाएं। आपकी उद्यमिता, नवाचार और अनुसंधान में सहभागिता देश को प्रगति के नए आयामों की ओर ले जाएगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य हमारे युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम और सशक्त बनाना है। संस्थान ने इसे अपनाकर अपने पाठ्यक्रमों को न केवल समृद्ध करने का प्रयास किया है, बल्कि विद्यार्थियों को एक बहु-आयामी दृष्टिकोण भी प्रदान किया है। मुझे विश्वास है कि यह संस्थान निरंतर अपने छात्रों को नवीनतम तकनीकों, अनुसंधान और व्यावसायिक कौशल से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।












