रांची :आज पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा PESA कानून को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में गठबंधन सरकार पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार, तथ्यहीन और राजनीतिक हताशा से प्रेरित हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिनके पास वर्षों तक सत्ता में रहते हुए PESA कानून लागू करने का अवसर था, वे आज उस सरकार पर सवाल उठा रहे हैं जिसने पहली बार इस कानून को व्यावहारिक, सहभागी और आदिवासी हितैषी रूप में लागू करने का साहसिक कदम उठाया है।
गठबंधन सरकार स्पष्ट करना चाहती है कि PESA कानून का मसौदा ग्रामसभा, सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों से व्यापक विमर्श के बाद तैयार किया गया है। यह कानून आदिवासी एवं मूलवासी समाज को जल, जंगल, जमीन और संसाधनों पर उनका संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करता है।
यह भी उल्लेखनीय है कि अर्जुन मुंडा जी स्वयं लंबे समय तक राज्य और केंद्र की सत्ता में रहे, लेकिन उस दौरान न तो PESA कानून लागू किया गया और न ही ग्रामसभा को वास्तविक अधिकार दिए गए। आज जब गठबंधन सरकार ने इसे जमीन पर उतारने का काम किया है, तो उस पर सवाल उठाना उनकी राजनीतिक विफलता को छिपाने का प्रयास मात्र है।
गठबंधन सरकार यह स्पष्ट रूप से कहना चाहती है कि PESA कानून आदिवासी एवं मूलवासी स्वशासन की आत्मा है और इसमें किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार आदिवासी समाज के हितों, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अर्जुन मुंडा जी से अपेक्षा है कि वे राजनीति से ऊपर उठकर आदिवासी हितों के मुद्दे पर तथ्यात्मक और सकारात्मक भूमिका निभाएँ, न कि जनता को भ्रमित करने वाले बयान दें।
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