रांची :भारत के शिक्षा क्षेत्र में निरंतर बदलाव हो रहा है। शिक्षा प्रणाली के विकास में नई-नई पहल हो रही हैं, और इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को एक ऐसा वातावरण प्रदान करना है, जिसमें वे न केवल शैक्षिक रूप से बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से भी विकसित हो सकें। ऐसी ही एक पहल की है रांची के राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय, मुरुम (कांके) ने, जो अपनी टीएलएम आधारित शिक्षा प्रणाली के लिए अन्य विद्यालयों के लिए भी एक प्रेरणा बन गया है। यह स्कूल विद्यार्थियों के लिए एक आदर्श बन चुका है, जहां पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ सीखने के नए और रचनात्मक तरीकों को अपनाया जाता है।राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय, मुरुम (कांके) एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय है। इस विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, साथ ही साथ उनके समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय, मुरुम में “टीएलएम” (Teaching Learning Materials) आधारित शिक्षा पद्धति का पालन किया जाता है, जो न केवल पाठ्यक्रम को रोचक और सरल बनाता है, बल्कि बच्चों के सीखने की क्षमता को भी बढ़ाता है।टीएलएम (Teaching Learning Materials) एक ऐसी पद्धति है जिसमें शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और इंटरैक्टिव बनाने के लिए विभिन्न सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। इन सामग्रियों में चार्ट्स, मॉडल्स, चित्र, कार्ड्स, ऑडियो-वीडियो उपकरण, और डिजिटल माध्यम शामिल हैं। इस पद्धति का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों पर निर्भर न रखकर, उन्हें विभिन्न साधनों के माध्यम से ज्ञान प्राप्ति के अवसर प्रदान करना है।टीएलएम का उपयोग विद्यार्थियों को एक सहज और संवादात्मक वातावरण में शिक्षा देने के लिए किया जाता है, ताकि वे अपनी समझ को दूसरों द्वारा उदाहरणों के माध्यम से बेहतर ढंग से समझ सकें। जीपीएस, मुरुम में टीएलएम का उपयोग अत्यधिक प्रभावी तरीके से किया जाता है, जिससे बच्चों को पढ़ाई में रुचि बनी रहती है और वे अच्छे से समझ पाते हैं।विद्यालय के प्रधान शिक्षक ओम प्रकाश मिश्रा द्वारा टीएलएम पर विशेष रूप से कार्य किया गया है और हर कक्षा, विषय और पाठ के अनुसार स्वयं से टीएलएम का निर्माण किया गया है। जीपीएस, मुरुम में शिक्षा को केवल जानकारी तक सीमित नहीं रखा जाता बल्कि यहां के छात्र की व्यक्तिगत क्षमताओं और रुचियों को पहचानते हुए उन्हें सिखाने के लिए विभिन्न संसाधनों का उपयोग किया जाता है। इस विद्यालय में शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया को और भी रोचक बनाने के लिए टीएलएम का उपयोग किया जाता है। शिक्षकों द्वारा टीएलएम का प्रयोग कक्षा में बच्चों के मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। उदाहरण के लिए, गणित में बच्चों को विभिन्न रूपों और चित्रों के माध्यम से संख्याओं की समझ दी जाती है। विज्ञान में बच्चों को प्राकृतिक घटनाओं का अध्ययन कराते समय चार्ट्स और मॉडल्स का उपयोग कर समझाया जाता है। इसके अलावा, भाषा शिक्षण में बच्चों को चित्रों, कार्ड्स और वाचन सामग्री का उपयोग करके अधिक सृजनात्मक तरीके से पढ़ाया जाता है।जीपीएस, मुरुम केवल एक शैक्षिक संस्थान ना रहकर बच्चों के रचनात्मकता और खेलकूद के लिए भी एक उत्तम स्थान बन गया है। यहां के शिक्षक बच्चों को खेलों के माध्यम से सीखने के कई अवसर प्रदान करते हैं। बच्चों को शारीरिक शिक्षा के साथ मानसिक गतिविधियों में भी भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाता है, ताकि उनका समग्र विकास हो सके।टीएलएम आधारित शिक्षा पद्धति के अनेक लाभ हैं। इस पद्धति से छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान से कहीं अधिक व्यावहारिक अनुभव मिलता है। इससे वे चीजों को सीधे तौर पर समझ पाते हैं और उनके अंदर आलोचनात्मक सोच विकसित होती है। टीएलएम के माध्यम से छात्रों की जिज्ञासा को बढ़ावा मिलता है, जिससे वे न केवल कक्षा में बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में नई जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रेरित होते हैं।इसके अलावा, टीएलएम छात्रों के सीखने के विभिन्न तरीके अपनाने में मदद करता है। हर बच्चा अलग होता है और उनकी सीखने की शैली भी अलग होती है। कुछ बच्चे दृश्य माध्यम से अधिक सीखते हैं, तो कुछ बच्चे श्रवण और अनुभव के माध्यम से। टीएलएम इन विविधताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा प्रदान करता है, जिससे सभी बच्चों को समान अवसर मिलते हैं।












