रांची : समावेशी शिक्षा के अंतर्गत रिसोर्स शिक्षकों/थेरेपिस्टों के लिए आज से झारखंड शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद, रांची में समेकित क्षेत्रीय केंद्र (दिव्यांगजन) रांची के द्वारा झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद एवं यूनिसेफ के सहयोग से तीन दिवसीय आवासीय कार्यशाला की शुरुआत हुई। इस कार्यशाला में सभी जिलों के रिसोर्स शिक्षक/थेरेपिस्ट शामिल हो रहे है। आज से दिनांक 19 फरवरी, 2025 तक चार बैच में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रथम बैच में छह जिलों के शिक्षक शामिल हो रहे है। पहले बैच में जिन जिलों के शिक्षक शामिल हो रहे है उनमे रांची, खूंटी, गुमला, पूर्वी सिंघभूम, सरायकेला और पश्चिमी सिंघभूम के शिक्षक शामिल हो रहे है। आज कार्यशाला के शुभारंभ के दौरान राज्य शिक्षा परियोजना निदेशक शशि रंजन, सीआरसी रांची के निदेशक सूर्यमणि प्रसाद, समावेशी शिक्षा की राज्य समन्वयक अरुणा लता केरकेट्टा, साईटसेवर्स इण्डिया के राज्य सलाहकार (समावेशी शिक्षा) चंदन सिंह, यूनिसेफ के राज्य सलाहकार संजीव कुमार और विजय समेत सभी छह जिलों से आये रिसोर्स शिक्षक/थेरेपिस्ट शामिल हुए। तीन दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन रिसोर्स शिक्षकों/थेरेपिस्टों को विकासात्मक दिव्यांगताओ में चिकित्सीय हस्तक्षेप, विकासात्मक दिव्यांगताओ में संवेदी एकीकरण, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए घर आधारित चिकित्सा, व्यक्तिगत शैक्षणिक योजना विकसित करना, हस्तक्षेप प्रक्रिया में माता-पिता की समान भागीदारी, भारतीय सांकेतिक भाषा की मूल बातें इतियादी विषयो में उनका ज्ञानवर्धन किया गया। वक्ता के रूप में सीआरसी रांची के लेक्चरर विद्याकर कुमार, चौधरी राजेश रंजन समल, सुमन कुमारी, राम प्रकाश राय, सीआइपी रांची की पूर्व सहायक प्रोफेसर मिट्टू मुत्थु वर्घी, शामिल हुई।
बजरंग दल के कार्यकर्ता समाजसेवा केलिए समर्पित….आदित्य साहू !
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