रांची :डॉ० श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, राँची के द्वितीय दीक्षान्त समारोह में मैं कुलाधिपति के रूप में आप सभी का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ। इस शुभ अवसर पर उपाधि प्राप्त करने वाले समस्त विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। आज का यह महत्त्वपूर्ण दिवस आपके कठोर परिश्रम, अडिग समर्पण का प्रतिफल है। इस अवसर पर मैं उन समस्त समर्पित शिक्षकों, अभिभावकों और मार्गदर्शकों को भी बधाई देता हूँ जिनके प्रेरणादायक मार्गदर्शन एवं समर्थन से आपने यह सफलता अर्जित की।
. यह दीक्षान्त समारोह केवल एक शैक्षिक यात्रा का समापन नहीं, अपितु आपके जीवन के एक नये और महत्त्वपूर्ण अध्याय के आरम्भ का प्रतीक है। आपने वर्षों तक कठोर परिश्रम, समर्पण और संघर्ष से जो ज्ञान और कौशल अर्जित किया है, वह आपको समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करेगा। मैं इस हेतु आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। आशा है कि आप अपने ज्ञान और नैतिकता के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम होंगे।
. विद्या वह दीपक है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर करके हमें सत्य और प्रकाश की ओर अग्रसर करता है। जितना अधिक विनम्रता होती है, उतना ही व्यक्ति अपने ज्ञान का सही उपयोग करता है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम होता है।
. इस विश्वविद्यालय का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर है। वे केवल एक दूरदर्शी राजनेता ही नहीं बल्कि राष्ट्र के शिल्पकार महान् विचारक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीयता और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची सेवा और समर्पण का अर्थ व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर समाज एवं राष्ट्र की सेवा करना है। उन्होंने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी, अपने विचारों के माध्यम से भारतीय समाज को जागरूक और सशक्त बनाने का कार्य किया। उनका जीवन हमें निःस्वार्थ सेवा, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्त्वपूर्ण पाठ पढ़ाता है, जो आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।
. इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को समाज के प्रति जागरूक, उत्तरदायी और सशक्त नागरिक बनाना भी है। राष्ट्र निर्माण की दिशा में इसकी प्रतिबद्धता अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। मैं अपेक्षा करता हूँ कि यहाँ के प्रत्येक विद्यार्थी राष्ट्र की प्रगति और समाज के कल्याण में सक्रिय भूमिका निभाकर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करें।
. मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह विश्वविद्यालय आने वाले समय में शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा और युवा पीढ़ी को राष्ट्र एवं समाज सेवा के लिए प्रेरित करेगा। मेरी शुभकामना है कि यह संस्थान सतत प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाए।
7. प्रसन्नता है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, जिसे 2018 में राज्य विश्वविद्यालय के रूप में अपग्रेड किया गया, ने राँची कॉलेज की गौरवशाली परंपरा को संजोते हुए झारखंड में उच्च शिक्षा और बौद्धिक उत्कृष्टता का एक प्रमुख केंद्र बनकर अपनी पहचान बनाने की दिशा में प्रयासरत है। मुझे यह कहते हुए हर्ष हो रहा है कि यह निरंतर ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
. विश्वविद्यालय का प्रमुख दायित्व न केवल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति जागरूक, उत्तरदायी नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना भी है। यहाँ ऐसा वातावरण हो, जिसमें न केवल झारखंड बल्कि अन्य राज्य के विद्यार्थी भी शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखें। यह विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षिक संस्थान नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार और सृजन का पवित्र स्थल है, जहाँ ज्ञान का अर्जन केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा हेतु किया जाता है।
. संस्कारयुक्त शिक्षा ही वास्तविक विकास का आधार है क्योंकि यह व्यक्ति को केवल बौद्धिक रूप से सशक्त नहीं बनाती, बल्कि उसे समाज के प्रति जिम्मेदार और संवेदनशील भी बनाती है। हमें अपनी जड़ों से जुड़कर अपनी संस्कृति का संरक्षण करना चाहिए क्योंकि यह हमें आत्म-निर्भरता, समता और मानवता का पाठ सिखाती है। इसलिए, शिक्षा के माध्यम से हमें अपनी संस्कृति को सम्मान देना और उसे संरक्षित करना चाहिए।
. शिक्षा का परम लक्ष्य केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य चरित्र निर्माण है। शिक्षा का कार्य व्यक्ति को बौद्धिक रूप से सक्षम बनाना है तथा उसके आचरण, विचार और व्यवहार को सुसंस्कृत बनाना है। महात्मा गांधी ने कहा था, “शिक्षा वह है जो मनुष्य के चरित्र को उज्ज्वल करे और उसे समाज के लिए उपयोगी बनाए।” एक शिक्षित व्यक्ति वही है, जो अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए करे। चरित्र निर्माण के बिना शिक्षा अधूरी है, क्योंकि यही वह आधार है, जो व्यक्ति को आदर्श नागरिक और सशक्त समाज का निर्माता बनाता है।
. आज का युवा भारत की शक्ति और संभावना का प्रतीक है। वह अपनी ऊर्जा, ज्ञान और कौशल से देश को सशक्त बना रहा है और वैश्विक मंच पर भारत की नई पहचान स्थापित कर रहा है। माननीय प्रधानमंत्री जी का “विकसित भारत @2047” का संकल्प केवल विचार नहीं, बल्कि यह एक ऐसा लक्ष्य है, जिसे पूरा करने में आप सभी का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह लक्ष्य भारत को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी दृष्टि से विश्व में अग्रणी बनाने का है। आपका ज्ञान, कौशल और परिश्रम ही भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाएगा। आप सभी से यह अपेक्षा है कि आप इस लक्ष्य को आत्मसात करें, अपने सपनों को राष्ट्रनिर्माण से जोड़ें और “विकसित भारत @2047” के निर्माण में योगदान दें। याद रखें, आपका ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज को सशक्त और समृद्ध बनाने में उपयोगी हो। एक बार पुनः आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
बजरंग दल के कार्यकर्ता समाजसेवा केलिए समर्पित….आदित्य साहू !
रांची :झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद आदित्य साहू ने आज मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर रजरप्पा में मां...












