रांचीः सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने झारखंड की राजधानी रांची में सेना की जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले का खुलासा किया है। एजेंसी ने इस सिलसिले में सेना के एक हवलदार और उसके एक निजी सहयोगी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। मामला डिफेंस लैंड (सेना की भूमि) पर निर्माण कार्य की अनुमति दिलाने से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला
सीबीआई द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आरोपी हवलदार डिफेंस लैंड NOC, R&O और FLT यूनिट में तैनात था। उसने शिकायतकर्ता से कथित रूप से यह कहते हुए रिश्वत मांगी कि यदि वह सेना की जमीन पर निर्माण कार्य को फिर से शुरू करना चाहता है, तो उसे पांच लाख रुपये देने होंगे।
पहले भी ले चुका था 50 हजार रुपये की किस्त
जांच एजेंसी के अनुसार, हवलदार ने पहले ही 13 जनवरी 2026 को शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये की एक किश्त प्राप्त कर ली थी। इसके बाद उसने बची हुई रकम को किस्तों में देने की मांग की। शिकायतकर्ता ने यह जानकारी सीबीआई को दी, जिसके बाद एजेंसी ने मामले की जांच शुरू की।
30 जनवरी को बिछाया गया था जाल
शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 30 जनवरी 2026 को रांची में एक ट्रैप (जाल) की योजना बनाई। तय समय पर जब आरोपी हवलदार और उसका सहयोगी शिकायतकर्ता से अगली किश्त के रूप में 50 हजार रुपये ले रहे थे, तभी सीबीआई की टीम ने दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया। टीम ने मौके से रिश्वत की रकम बरामद कर ली और दोनों को तत्काल हिरासत में ले लिया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
सीबीआई ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
आवासीय परिसरों पर छापेमारी, मिले अहम सबूत
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने दोनों आरोपियों के आवासीय परिसरों पर छापेमारी की। इस दौरान एजेंसी को कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले हैं, जो कथित रिश्वत लेनदेन से जुड़े होने की आशंका है। सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि बरामद सामग्री की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई उसी के आधार पर की जाएगी।
सीबीआई की सख्त निगरानी में मामला
सूत्रों के अनुसार, यह मामला रक्षा संपत्ति से जुड़ा होने के कारण सीबीआई मुख्यालय ने इसे विशेष निगरानी में रखा है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस घोटाले में अन्य अधिकारी या बिचौलिए भी शामिल थे।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि—
“सेना की भूमि राष्ट्रीय संपत्ति है और इससे जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया।
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