जब पाणिनि ने बोली जाने वाली भाषा की अव्यवस्था को एक संक्षिप्त, गणनीय व्याकरण में परिवर्तित किया, तो उन्होंने एक बात साबित की, जो आज भी प्रासंगिक है: बुद्धिमत्ता सबसे शक्तिशाली तब होती है, जब इसे संरचना के रूप में व्यक्त किया जाता है। नालंदा इस सहज प्रवृत्ति को संस्थानों तक ले गया और बहस करने, संरक्षित करने और ज्ञान को सीमाओं के पार प्रसार करने के तरीके विकसित किए। भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की मेजबानी करने का भारत का निर्णय उसी सभ्यतागत भावना से प्रेरित है, क्योंकि तकनीक में अगली छलांग उन प्रणालियों के बारे में है, जो सीख सकती हैं, तर्क कर सकती हैं और बड़े पैमाने पर कार्य कर सकती हैं और दुनिया ऐसे भविष्य के बारे में सोच नहीं सकती, जिसमें केवल कुछ देश यह तय करें कि ये प्रणालियाँ कैसे बनाई जाएँगी।
पिछले सप्ताह भारत मण्डपम में आयोजित यह शिखर सम्मेलन, एक वैश्विक दक्षिण राष्ट्र द्वारा आयोजित पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन था और किसी भी पूर्व आयोजन में इस स्तर की भागीदारी नहीं देखी गयी: 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री, 100 से अधिक देशों के 500 से अधिक एआई दिग्गज और विषय-आधारित दस पवेलियनों में 300 प्रदर्शक। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत अपनी स्वयं की एक संगठनात्मक सोच प्रस्तुत कर रहा है: डेटा पर संप्रभुता, डिज़ाइन के अनुसार समावेश और स्वाभाविक जवाबदेही। देश वैश्विक पूंजी को इन शर्तों पर यहाँ निवेश करने के लिए आमंत्रित कर रहा है।
प्रधानमंत्री के एम.ए.एन.ए.वी विजन में इस विचार की स्पष्ट अभिव्यक्ति हुई है: नैतिक पाबंदी, जवाबदेह शासन, डेटा पर संप्रभुता, ताकि ज्ञान के कच्चा माल का उस रूप में निष्कर्षण न किया जाए जैसे कभी वस्तुओं का किया जाता था; व्यापक पहुंच, ताकि लाभ मध्य प्रदेश के किसान तक उतने ही निश्चित रूप से पहुंचे, जितना बेंगलुरु के इंजीनियर तक और कानूनी वैधता, ताकि हर प्रयुक्त प्रणाली लोकतांत्रिक निरीक्षण के प्रति जवाबदेह बनी रहे। उनकी अवधारणा एआई को खुला आकाश देने की है, जबकि नियंत्रण मानव हाथों में रखा जाना चाहिए। यह अवधारणा एक ऐसी रेखा खींचती है, जिसे कई उन्नत अर्थव्यवस्थाएं खींचने में हिचकिचा रही हैं।
अब इन सिद्धांतों का बहुपक्षीय महत्व है, जो शिखर सम्मेलन में अपनाई गई दिल्ली घोषणा के माध्यम से सामने आया, और इसे पहले से ही वैश्विक दक्षिण से आने वाली पहली प्रमुख एआई शासन रूपरेखा कहा जा रहा है। इस घोषणा की दृष्टि विकास-उन्मुख है, जिसका केंद्र तकनीकी-कानूनी दृष्टिकोण है और जो कठोर अनुपालन की तुलना में लचीली पाबंदियों को प्राथमिकता देता है। यह वैश्विक सहयोग को तीन स्तंभों पर व्यवस्थित करता है: लोग, पृथ्वी और प्रगति। भारतजेन जैसा जनसंख्या के पैमाने पर आधारित समाधान, जो 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है और उस वास्तविकता को संबोधित करता है कि दुनिया का अधिकांश भाग अंग्रेज़ी में काम नहीं करता। भारत के अपने सब्सिडी वाले जीपीयू एक्सेस (₹65 प्रति घंटा) पर आधारित एक प्रस्तावित वैश्विक कंप्यूट बैंक प्रवेश बाधाओं को हर जगह कम करता है। घोषणा में डेटा संप्रभुता पर जोर दिया गया है, जो सीधे एआई निष्कर्षणवाद को चुनौती देता है: एक पैटर्न, जिसमें विकासशील देशों से डेटा संग्रहित किया जाता है ताकि मॉडल को प्रशिक्षित किया जा सके। बाद में इन देशों को इसी मॉडल के लिए भुगतान करना पड़ता है।
पिछले दशक के कार्यान्वयन ने इस रूपरेखा को विश्वसनीयता दी है, क्योंकि यह सरकार एआई तक किसी श्वेत पत्र के माध्यम से नहीं, बल्कि किसी भी लोकतांत्रिक देश द्वारा शुरू किये गये सबसे महत्वाकांक्षी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना कार्यक्रम के जरिये पहुँची है। यूपीआई ने 2025 में 228 बिलियन से अधिक लेन-देन संसाधित किए, जिनका मूल्य लगभग 3.4 ट्रिलियन डॉलर था, जो दुनिया के वास्तविक समय पर कुल डिजिटल भुगतान का लगभग आधा है और यह वैश्विक स्तर पर वीसा द्वारा संसाधित किये गये कुल लेन-देन से भी अधिक है। जेएएम त्रय ने 2015 से अब तक ₹3.48 लाख करोड़ से अधिक की कल्याण बचत प्रदान की है। किसी अन्य देश ने एक ही नीतिगत व्यवस्था के तहत पहचान, भुगतान और पात्रता-अधिकार के वितरण का निर्माण इस स्तर पर नहीं किया है और यही वह आधारशिला है, जिस पर भारत का एआई खड़ा है।
यदि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का लक्ष्य हर नागरिक को देश से जोड़ना था, तो एआई अवसंरचना का लक्ष्य हर नागरिक को क्षमता से जोड़ना है और यहाँ आंकड़े एक चौंकाने वाला अंतर दिखाते हैं: भारत दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत डेटा का उत्पादन करता है, लेकिन यहाँ वैश्विक डेटा-केंद्र क्षमता का केवल लगभग 3 प्रतिशत मौजूद है। अब इस अंतर को उसी इरादे के साथ पाटा जा रहा है, जिसने यूपीआई का निर्माण किया था: तेज़, बड़े पैमाने पर और संप्रभु डिजाइन के साथ।
विचार करें कि भारत मंडपम में एक ही सप्ताह में क्या घोषणाएँ की गईं। माइक्रोसॉफ्ट: 2030 तक वैश्विक दक्षिण के लिए 50 बिलियन डॉलर, जिसमें से पहले ही 17.5 बिलियन डॉलर की भारत के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की गयी है। गूगल: अमेरिका-भारत संपर्क पहल, जो पांच वर्षों में 15 बिलियन डॉलर से संचालित होगी। अमेज़न वेब सर्विसेज़: महाराष्ट्र में 8.3 बिलियन डॉलर। अदानी समूह: 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा-संचालित एआई डेटा केन्द्रों के लिए 100 बिलियन डॉलर। योटा डेटा सर्विसेज़: एनवीडिया के ब्लैकवेल अल्ट्रा चिप्स का उपयोग करके एशिया के सबसे बड़े एआई कंप्यूटिंग हब में से एक के लिए 2 बिलियन डॉलर से अधिक। लार्सन एंड टुब्रो: एनवीडिया के साथ भारत की सबसे बड़ी गीगावाट-स्केल एआई फैक्ट्री बनाने के लिए प्रस्तावित परियोजना। इंडियाएआई मिशन का राष्ट्रीय कंप्यूट क्लस्टर 38,000 जीपीयू पार कर चुका है और इसे 58,000 तक बढ़ाया जा रहा है, जो स्टार्टअप्स के लिए वैश्विक लागत के लगभग एक तिहाई पर उपलब्ध है। अगले दो वर्षों में एआई अवसंरचना में 200 अरब डॉलर के निवेश का सरकार का लक्ष्य महज आकांक्षा नहीं है; घोषित प्रतिबद्धताएँ इसे हासिल करने के दायरे में लाती हैं।
केंद्रीय बजट 2026-27 का उद्देश्य इस निवेश को दीर्घकालिक संरचनात्मक लाभ में बदलने का है, जो उन विदेशी कंपनियों के लिए टैक्स होलीडे का 2047 तक विस्तार करता है, जो वैश्विक क्लाउड सेवाओं के लिए भारतीय डेटा सेंटर का उपयोग करती हैं तथा एआई और उच्चतम निर्माण स्टार्टअप्स के लिए 1.1 अरब डॉलर के वेंचर कैपिटल फंड का वचन देती हैं। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन, जिसका परिव्यय 34,000 करोड़ रुपये से अधिक का है, लिथियम, कॉबाल्ट और दुर्लभ पृथ्वी धातुओं को सुरक्षित करता है, जिन पर एआई और सेमीकंडक्टर का निर्माण निर्भर होता है।
हालाँकि यह सब तब तक मायने नहीं रखता, जब तक यह लोगों तक नहीं पहुँचता। शिखर सम्मेलन के पहले दिन, 2.5 लाख से अधिक छात्रों ने नवाचार के लिए जिम्मेदार एआई का उपयोग करने की शपथ ली, यह संख्या गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की मान्यता के लिए प्रस्तुत की गई है। तीस डेटा और एआई लैब्स स्तर 2 और स्तर 3 के शहरों में काम कर रहे हैं, जो 570-लैब नेटवर्क की योजना का पहला प्रयास है, जबकि एआईकोश 7,500 से अधिक डेटासेट और 273 मॉडलों को साझा सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में पेश करता है। जब यह सरकार सत्ता में आई थी, तब भारत में 16 आईआईटी थे; आज 23 हैं। ओपनएआई के सीईओ ने बताया कि भारत चैटजीपीटी का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है, जिसके 100 मिलियन साप्ताहिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। खपत यहाँ है, और उत्पादन क्षमता रफ़्तार पकड़ बना रही है: शिखर सम्मेलन में तीन संप्रभु एआई मॉडल पेश किए गए, जिनमें सर्वम एआई का 105-बिलियन-पैरामीटर व्यापक भाषा मॉडल शामिल है, जिसे पूरी तरह भारतीय कंप्यूटिंग और भारतजेन का परम2 पर प्रशिक्षित किया गया है, एक 17-बिलियन-पैरामीटर बहुभाषी मॉडल, जो सभी 22 अनुसूचित भाषाओं का समर्थन करता है। ये विदेशी मॉडलों के अनुकूल किये गये संस्करण नहीं हैं; इन्हें संप्रभु अवसंरचना पर शुरुआत से बनाया गया है।
यह भी जानकारी देने योग्य है कि साझेदारी की संरचना अब कैसे तैयार की जा रही है, क्योंकि अब यह विदेशी तकनीक के लाइसेंस के बारे में नहीं है, बल्कि संप्रभु क्षमता के सह-निर्माण के बारे में है। टाटा समूह की ओपनएआई के साथ रणनीतिक साझेदारी स्टारगेट पहल के तहत 100 मेगावाट एआई-तैयार डेटा सेंटर क्षमता के साथ शुरू होगी और इसका विस्तार एक गीगावाट तक किया जाएगा। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय उद्योग, वैश्विक ज्ञान परिदृश्य में मांग पक्ष से आपूर्ति पक्ष की ओर आगे बढ़ रहा है। शिखर सम्मेलन के दौरान भारत द्वारा पैक्स सिलीका घोषणा पर औपचारिक हस्ताक्षर अमेरिकी-नेतृत्व वाले गठबंधन में देश को एआई, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित रखने वाले देशों में शामिल करता है, जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया अन्य सदस्य हैं। इसके साथ ही द्विपक्षीय भारत-अमेरिका एआई अवसर साझेदारी पर हस्ताक्षर किये गये हैं, जो दोनों देशों को महत्वपूर्ण तकनीकों पर नवाचार-प्रवृत्त दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रतिबद्ध करती है, जबकि भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष, 2026 एक और आयाम जोड़ता है, जो संयुक्त कौशल विकास और मापनीय परिणामों से संबंधित है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन श्रृंखला की मेजबानी करने वाला पहला वैश्विक दक्षिण देश केवल एक संवाद आयोजित नहीं कर रहा था, बल्कि उसने यह स्पष्ट कर दिया कि वह किन शर्तों पर प्रतिस्पर्धा करना चाहता है: एक दिल्ली घोषणा पत्र, जो एआई शासन के नियमों को फिर से तैयार करता है, डिजिटल अवसंरचना, जो दुनिया में वास्तविक समय पर होने वाले लगभग आधे भुगतानों को संसाधित करती है, सैकड़ों अरबों की निवेश प्रतिबद्धताएं, पूरी तरह से नए सिरे से बनाए गए संप्रभु मॉडल, और एआई युग की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा संरचना में प्रवेश। पाणिनि का सबक कभी जटिल नहीं था। संरचना ही बुद्धिमत्ता है। भारत अब उस संरचना का निर्माण कर रहा है।
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