नई दिल्ली: देश के दूसरे बड़े रईस और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी रियल एस्टेट की दुनिया में एक बहुत बड़ी डील करने की तैयारी में हैं। सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह अपनी 88 प्रॉपर्टीज को अडानी प्रॉपर्टीज लिमिटेड को बेचना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, इस डील की कीमत 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो यह देश के इतिहास में सबसे बड़ी रियल एस्टेट डील हो सकती है।
सहारा ग्रुप की तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस बी. आर. गवाई और जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस एम. एम. सुंदरेश की बेंच को बताया कि दोनों कंपनियों के बीच एक टर्म शीट साइन हो गया है और उसे सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में जमा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद ही इस डील को आगे बढ़ाया जाएगा। सिब्बल ने यह भी बताया कि इस डील से मिलने वाला पैसा सहारा ग्रुप के बकाये को चुकाने के लिए काफी होगा।
कहां-कहां है प्रॉपर्टीज
इस डील का समर्थन करते हुए सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अडानी ग्रुप सहारा की प्रॉपर्टीज को एक साथ खरीदना चाहता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद ही इस डील को आगे बढ़ाया जाएगा। रोहतगी ने कोर्ट को यह भी बताया कि टर्म शीट सीलबंद लिफाफे में जमा कर दी गई है और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि अडानी ग्रुप सहारा की 88 प्रॉपर्टीज के लिए कितनी रकम की पेशकश कर रहा है। ये प्रॉपर्टीज पूरे भारत में फैली हुई हैं।
हालांकि टर्म शीट से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि यह डील 1 लाख करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा की है। लेकिन उन्होंने सहारा और अडानी के बीच तय हुई रकम को बताने से इनकार कर दिया।
एमिकस क्यूरी और सीनियर एडवोकेट शेखर नफाडे ने कोर्ट को बताया कि सहारा ग्रुप की दो कंपनियों सहारा हाउसिंग और सहारा रियल एस्टेट को 2012 में सेबी-सहारा खाते में 25,000 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया था। इसमें से अब भी 9,481 करोड़ रुपये जमा करने हैं।
सरकार से जवाब
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने SEBI-सहारा खाते से निवेशकों का पैसा वापस दिलाने का काम शुरू किया है। उन्होंने कहा कि सहारा-अडानी लैंड डील की सरकारी स्तर पर जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने उनकी इस बात को मानते हुए केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय को इस मामले में पक्षकार बनाने की मंजूरी दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों मंत्रालयों, SEBI और एमिकस क्यूरी से तीन हफ्तों के अंदर सहारा-अडानी डील पर अपना जवाब मांगा है।
कोर्ट ने शेखर नफाडे से प्रॉपर्टीज की लिस्ट बनाने और उनकी वर्तमान स्थिति बताने में भी मदद मांगी है। एमिकस क्यूरी ने कहा कि सहारा को उन प्रॉपर्टीज की पहचान करनी चाहिए जिन पर किसी तीसरे पक्ष का हक बन गया है। कपिल सिब्बल ने कहा कि कई ऐसी प्रॉपर्टीज हैं जिनके बारे में ग्रुप को पता नहीं था क्योंकि उन्हें कर्मचारियों द्वारा मैनेज किया जाता था। इसीलिए समझौते में 88 प्रॉपर्टीज और अन्य प्रॉपर्टीज का जिक्र है। इसका मतलब है कि जैसे-जैसे और प्रॉपर्टीज का पता चलेगा, उन्हें भी शामिल किया जाएगा।
क्या होगा फायदा ?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार, सेबी और एमिकस क्यूरी से जवाब मिलने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि प्रॉपर्टीज को एक साथ बेचा जाए या टुकड़ों में। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को तय की है। यह डील अगर पूरी होती है तो यह भारत के रियल एस्टेट इतिहास की सबसे बड़ी डीलों में से एक होगी। इससे न केवल सहारा ग्रुप के बकाए चुकाने में मदद मिलेगी, बल्कि अडानी ग्रुप के रियल एस्टेट पोर्टफोलियो में भी बड़ा इजाफा होगा।
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