रांची : दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उदघाटन न्यायामूर्ति झारखण्ड उच्च न्यायालय-सह-कार्यपालक अध्यक्ष, झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची सुजित नारायण प्रसाद के द्वारा रांची न्यायमंडल, रांची से ऑनलाईन माध्यम से किया गया। इस अवसर पर माननीय न्यायामूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, माननीय न्यायायुक्त, अनिल कुमार मिश्रा-1, सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना, व्यवहार न्यायालय, रांची के सभी एजेसी, न्यायिक पदाधिकारीगण, न्यायिक दण्डाधिकारीगण, डिप्टी सेक्टरेटरी झालसा, अभिषेक कुमार, डालसा सचिव, राकेश रौशन, उपायुक्त रांची, मंजुनाथ भजंत्री, रांची एसपी राकेश रंजन, रूरल एसपी ग्रामीण गौरव गोस्वमी, प्रधान सचिव विधि विभाग निरज कुमार श्रीवास्तव, निदेशक जुडिशियल एकेडेमी, झारखण्ड राजेश शरण सिंह, मेम्बर ऑफ रजिस्ट्री, झारखण्ड हाई कोर्ट, रांची, ओ.एस.डी.-टू- गवर्नर गति कृष्णा तिवारी, एसडीओ रांची, कुमार रजत, डीजीएम एसबीआई, रिजनल ऑफिस रांची, मनोज कुमार, आरएम एसबीआई, रिजनल ऑफिस रांची श्री राजीव कुमार, डीजेडएम रांची, श्री ज्योति कुमार सिंह, डीआइओ रांची, एनआईसी रांची, एडीआईओ, रांची एनआईसी रांची, रांची जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, शम्भू प्रसाद अग्रवाल, महासचिव संजय कुमार विद्रोही, एलएडीसीएस के सदस्यगण, मध्यस्थ एवं अधिवक्तागण, कर्मचारीगण, पीएलवी समेत अन्य लोग उपस्थित थे।
दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत कार्यक्रम का उदघाटन मंचासीन लोगों के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में एंकरिंग न्यायिक दण्डाधिकारी श्रीमति परिधि शर्मा एवं श्रृष्टि कुमारी के द्वारा किया गया।
उदघाटन कार्यक्रम में स्वागत भाषण सदस्य सचिव, कुमारी रंजना अस्थाना ने दिया उन्होंने कहा कि न्यायामूर्ति सुजीत नारायण के मार्गदर्शन में झालसा और डालसा के द्वारा झारखण्ड राज्य के विभिन्न जिलों में अच्छा काम किया जा रहा और आगे भी क्या जायेगा। के दिशा-निर्देश पर न्यायिक प्रणाली की गति तेज हुई है, न्याय के प्रति आम जनमानस में विश्वास जगी है। न्याय सिर्फ न्यायालय तक ही सीमित नहीं है, अब यह जागरूकता के माध्यम से जन-जन तक पहूंच रहा है।
न्यायामूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष का दूसरा राष्ट्रीय लोक अदालत का उदघाटन आज रांची न्यायमण्डल से किया जा रहा है। यह एक कार्यक्रम ही नहीं बल्कि एक उत्सव हैं। उन्होंने कहा कि विद्वान अधिवक्ताओं को भी जागरूकता के माध्यम से लोगों को जागरूक करना चाहिए, लोग जागरूक होंगे, तो अधिक से अधिक वादों का निस्तारण होगा और लोगो को निःशुल्क और शीघ्र न्याय मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोक अदालत एक मंच है, जहां वादों का निस्तारण एक ही मंच पर किया जाता है, इससे वादकारियों को धन व समय की बचत होती है तथा न्यायालय में लंबित मामले भी कम होते है। परिवार के विकास के लिए, समाज के विकास के लिए, देश के विकास के लिए फोकस करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय प्रणाली में पीएलवी रीढ़ की हड्डी है। पीएलवी गांवों में, कस्बों में, मुहल्लों में एवं सुदुरवर्ती क्षेत्रों में जागरूकता कर जरूरतमंदों को लाभ पहुंचा रहे है। उन्होंने सेमिनार के द्वारा प्रचार-प्रसार के द्वारा विधिक जागरूकता पर जोर देने पर फोकस किया। आगे उन्होंने यह भी कहा कि लंबित वादों के निस्तारण में अधिवक्ताओं व मध्यस्थों की भूमिका अहम है। जस्टिस सुजीत नारायण ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत वादकारियों के लिए सुलभ व निःशुल्क न्याय पाने का माध्यम है। उन्होंने पारिवारिक वादों में डिस्ट्रेश वारंट के पेंडेंसी को कम करने पर जोर दिया।
बताते चले कि, जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद एवं माननीय न्यायायुक्त के हाथों से आज व्यवहार न्यायालय, रांची में दीदी कैफे, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण, वलनेरेबल विटनेश डिपोजिशीन सेंटर, प्रोटेक्टेड विटनेष रूम तथा क्यू.आर. कोड जेनेरेटेड एप्लिकेशन सिस्टम का उदघाटन भी किया गया।
मौके पर, रांची जिला बार एसोसिएशन के महासचिव, संजय विद्रोही ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में वादकारियों के वादों के अधिक-से-अधिक निस्पादन पर ही फोकस है।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन माननीय न्यायायुक्त श्री अनिल कुमार मिश्रा-1 के द्वारा किया गया उन्होंने कहा कि इस दूसरी लोक अदालत में अधिक-से-अधिक वादों के निस्तारण पर ही हमलोगों का फोकस है। इसके लिए पूर्व में ही जिला प्रशासन बैंक, इंशुरेंश कंपनी के साथ समन्वय स्थापित कर वादकारियों को नोटिस भेजा गया है, ताकि अधिक से अधिक वादों का निस्तारण किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए न्यायिक दंडाधिकारियों के लिए 40 तथा कार्यपालक दंडाधिकारियों के लिए 20 बेंच का गठन किया गया है। न्यायिक दंडाधिकारियों, बैंक व इंशुरेंश कंपनी के प्रतिनिधियों, पुलिस प्रशासन एवं जिला प्रशासन के साथ पूर्व में बैठके की गयी थी।
न्यायामूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने ने व्यवहार न्यायालय रांची में लगाये गये स्टॉलों का मुआयना भी किये।
यह भी ज्ञात हो कि कार्यक्रम के दौरान लोक अदालत में लाभुकों के बीच माननीय न्यायामूर्ति व माननीय न्यायायुक्त के हाथों चेक का वितरण भी किया गया। गीता सिंह को मोटर वाहन दुर्घटना में मिलनेवाली मुआवजा के तौर 13,2,18,496 रूपये के चेक का वितरण किया गया।
यह भी ज्ञात हो कि अन्य न्यायिक पदाधिकारियों के द्वारा झारखण्ड पीड़ित मुआवजा के तहत कुल 00 पीड़ितों के बीच 0000/- रूपये चेक का वितरण भी किया गया।
इसके साथ ही वाहन दुर्घटना मुआवजा में न्यायिक पदाधिकारियों के द्वारा 36 पीड़ितों के बीच 20,06,40,672/- राशि के चेकों का वितरण किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए न्यायिक दण्डाधिकारियों के लिए 40 बेंच एवं कार्यपालक दण्डाधिकारियों के लिए 20 बेंच का गठन किया गया था।
आज आयोजित होनेवाले राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल लंबित मामले 47397 तथा प्री-लिटिगेशन के 832365 वादों का निस्तारण किया गया साथ ही 1,36,99,52,446.21राशि का हुआ सेटलमेंट।













