रांची :झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में कृषि , पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के अनुदान मांग पर अपनी सहमति , अपना सुझाव और इसकी सराहना करने वाले सभी सदस्यों के प्रति दिल से आभार जताती हूं. वित्तीय वर्ष 2026 – 27 में विभाग का बजट 4 हजार 884 करोड़ 20 लाख रुपए है . सदन में बीजेपी का दावा और जमीनी हकीकत हाथी के दांत की तरह है जो खाने को कुछ और दिखाने को कुछ है . जब किसानों के फसल का MSP बढ़ाने की बात होती है तो केंद्र सरकार इसे नकार देती है . सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने के लिए आर्थिक असमानता को दूर करने ही नहीं है बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक असमानता को दूर करना भी जरूरी है . समाज आज भी जाति – धर्म और वर्ग के आधार पर बंटा हुआ है . ये बजट आय की सुरक्षा , महिला के सशक्तिकरण , आर्थिक असमानता को दूर करने के साथ राज्य की स्थिरता को दर्शाने वाला बजट है . किसानों को आधुनिक कृषि प्रणाली से जुड़ने की जरूरत है . आज राज्य में 1 लाख हेक्टेयर में मोटे अनाज की खेती हो रही है . राज्य में 5 लाख किसानों को ऋण माफी योजना का लाभ मिल चुका है . ग्रीन इकोनॉमी की सोच के साथ करंज का झारखंड से निर्यात बहुत बड़ी सफलता है . दुग्ध में दो गुना उत्पादन और बेकन फैक्ट्री को पुनर्जीवित करने की पहल तेज हो गई है . ” महिला किसान खुशहाली योजना ” महिलाओं के जीवन में नया रंग भरने और उन्हें सशक्त बनाने में सफल रहेगी . हर विधानसभा में माननीय विधायकों की अनुशंसा कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया जाएगा . हमारा लक्ष्य राज्य के किसानों को प्रगतिशील किसान बनाना और उनकी आय बढ़ाना है .
कृषि , पशुपालन एवं सहकारिता विभाग का वित्तीय वर्ष 2026 – 27 का बजट 4 हजार 884 करोड़ 20 लाख रुपए है . योजना मद में 4 हजार 275 करोड़ का बजट उपबंध किया गया है , जिसमें 3 , 825 करोड़ राज्यांश और 450 करोड़ केंद्रांश शामिल है . ये महज बजट आंकड़ा नहीं , बल्कि झारखंड के किसानों के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है . विभाग के द्वारा कुल 81 योजनाएं संचालित की जाएंगी , जिसमें 56 राज्य योजनाएं और 25 केंद्र प्रायोजित योजनाएं शामिल है .
कृषि प्रक्षेत्र ….
वित्तीय वर्ष 2026 – 27 में कृषि प्रक्षेत्र का योजना बजट 2 हजार 200 करोड़ रुपए है . झारखंड के किसानों को आत्म निर्भर और आय सुरक्षित बनाने का स्पष्ट संकल्प इस बजट में दिखता है . कृषि , बागवानी और मृदा संरक्षण को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ सुदृढ़ करना इस बजट का उद्देश्य है . विभाग ने मृदा एवं जल संरक्षण के लिए 475 करोड़ 50 लाख , बीज उत्पादन एवं फसल विविधीकरण के लिए 145 करोड़ और अनुसंधान एवं तकनीकी सुदृढ़ीकरण के लिए 160 करोड़ का प्रावधान किया है . इसी तरह कृषि यंत्रीकरण के लिए 80 करोड़ , किसान समृद्धि योजना के लिए 75 करोड़ के साथ एकीकृत बिरसा ग्राम विकास योजना सह किसान स्कूल के लिए 70 करोड़ की राशि बजट में रखा है . बागवानी क्षेत्र में 124 करोड़ 93 लाख रुपए राज्य बागवानी विकास योजना और 81 करोड़ 38 लाख रुपए जैविक प्रमाणीकरण के लिए प्रस्तावित किया है . विभाग का लक्ष्य : आत्मनिर्भर किसान , सशक्त गाँव और समृद्ध झारखंड का निर्माण करना है .
पशुपालन प्रक्षेत्र ….
पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026 – 27 के योजना मद में 500 करोड़ का प्रावधान किया गया है . सबसे अधिक मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के लिए 170 करोड़ रुपए विभाग खर्च करेगी . जिसमें बकरी , सूकर, पोल्ट्री सहित अन्य लाभार्थी आधारित योजनाएं शामिल है . एकीकृत कुक्कुट विकास योजना के लिए 126 करोड़ और पशु स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 33 करोड़ का प्रावधान किया गया है . राष्ट्रीय पशुधन मिशन , रोग नियंत्रण कार्यक्रम एवं मोबाइल वेटनरी इकाइयों के माध्यम से उत्पादकता और रोग प्रबंधन को मजबूत किया जाएगा .
डेयरी प्रक्षेत्र ….
डेयरी प्रक्षेत्र के लिए वित्तीय वर्ष 2026 – 27 के योजना मद में 425 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है . मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत दुग्ध पशु वितरण , कामधेनु डेयरी फार्मिंग और तकनीकी इनपुट के मद में 206 करोड़ 5 लाख रुपए प्रस्तावित है . वहीं नस्ल सुधार एवं उत्पादकता वृद्धि के लिए 3 हजार कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों के सुदृढ़ीकरण के लिए 25 करोड़ रुपए प्रस्तावित है . विस्तार एवं कौशल विकास कार्यक्रम के लिए 25 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए है . झारखंड दुग्ध महासंघ को दुग्ध संग्रहण एवं विपणन सुदृढ़ीकरण के लिए 105 करोड़ 30 लाख रुपए प्रस्तावित है . दुग्ध उत्पादकों को मूल्य प्रोत्साहन के मद में 40 करोड़ 15 करोड़ का प्रावधान किया गया है .
मत्स्य प्रक्षेत्र …..
पशुपालन के साथ – साथ मत्स्य पालन का क्षेत्र ग्रामीण आय – विविधीकरण और पोषण सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार है . वित्तीय वर्ष 2026 – 27 में मत्स्य प्रक्षेत्र के योजना मद में 250 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है . जिसमें राज्य योजना अंतर्गत सर्वाधिक 136 करोड़ का प्रावधान तालाबों एवं जलाशयों के पुनरुद्धार और विकास के लिए किया गया है . स्थानीय स्तर पर मत्स्य उत्पादन क्षमता में वृद्धि सरकार का लक्ष्य है .
सहकारिता प्रक्षेत्र ….
कृषि , पशुपालन , मत्स्य और डेयरी क्षेत्रों में उत्पादन एवं आय वृद्धि के प्रयास तभी पूर्ण रूप से होंगे , जब उनके साथ सशक्त सहकारिता तंत्र जुड़ा हो . सहकारिता सिर्फ एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं , बल्कि किसानों , उत्पादकों और ग्रामीण समुदायों की सामूहिक शक्ति का संगठित स्वरूप है . इसी दृष्टिकोण से वित्तीय वर्ष 2026 – 27 में सहकारिता प्रक्षेत्र के योजना मद में 900 करोड़ रुपए प्रस्तावित किया गया है . बिरसा किसान फसल बीमा योजना के तहत प्राकृतिक आपदाओं एवं फसल नुकसान पर 400 करोड़ रुपए का प्रावधान प्रीमियम अनुदान मद में किया गया है . अनाज भंडारण कार्यक्रम के अंतर्गत 2 हजार 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले 72 गोदामों के निर्माण हेतु 120 करोड़ 85 लाख रुपए का प्रस्ताव है . इसके अलावा राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्थित लैंप्स – पैक्स में सहकारी विपणन परिसर सह सौर पैनल आधारित कोल्ड रूम के निर्माण के लिए 162 करोड़ 21 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है .
वित्तीय वर्ष 2026 – 27 में प्रस्तावित नई योजनाएं – नई पहल ….
नारी शक्ति को सामाजिक उपेक्षा एवं आर्थिक विपन्नता के जंजीरों से मुक्त करने के लिहाज से महिला किसानों के लिए विभाग ने नई योजना तैयार की है . जिसका नाम ” महिला किसान खुशहाली योजना ” है . इस योजना का उद्देश्य महिला किसानों को समेकित कृषि प्रणाली से जोड़ते हुए उनकी आर्थिक समृद्धि , आय सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा में स्थाई रूप से सुधार करना है . इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026 – 27 में 25 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया है . योजना के अंतर्गत पात्र महिला किसानों को शत प्रतिशत अनुदान पर गुणवत्तापूर्ण बीज , उर्वरक , सिंचाई सुविधा और चयनित पशुधन सहायता उपलब्ध कराया जाएगा . इसके साथ ऐसी महिला किसानों को किसान उत्पादक संगठनों ( FPO) एवं स्वयं सहायता समूहों ( SHG) के माध्यम से संस्थागत सहयोग प्रदान कर बाजार से सीधे जोड़ने की योजना है . प्रथम चरण में अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग की महिला किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी . चरणबद्ध रूप से अन्य वर्गों की महिला किसानों को भी योजना से आच्छादित किया जाएगा . विभाग का स्पष्ट मानना है कि जब महिला किसान सशक्त होती है , तब केवल एक परिवार नहीं , बल्कि पूरा समाज सशक्त होता है . इस योजना से महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सामाजिक सम्मान भी बढ़ेगा . नकदी एवं उच्च मूल्य की फसलों को प्रोत्साहित करने की योजना है . विशेष रूप से चाय , काजू , लाह तथा गन्ना इसमें शामिल है . झारखंड में उपलब्ध जल संसाधन और ग्रामीण प्राकृतिक परिदृश्य मत्स्य पालन के साथ – साथ पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाओं की ओर इशारा करते है . एक्वा कल्चर पर्यटन के तहत मत्स्य पालन गतिविधियों को ग्रामीण पर्यटन के साथ जोड़ा जाएगा . ऐसा करने से पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति और मत्स्य आधारित जीवनशैली से परिचित होने का अवसर मिलेगा . इससे स्थानीय समुदायों को मत्स्य उत्पादन के अतिरिक्त पर्यटन एवं सहायक सेवाओं के माध्यम से आय के नए अवसर प्रदान होंगे . विभाग का उद्देश्य किसान परिवार को सम्मान , सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करने के साथ उनके आय को बढ़ाना है .
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड में मंगलवार को सीबीआई की टीम ने छापेमारी की !
रांची:झारखंड के राजधानी स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड में मंगलवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की टीम ने छापेमारी की।...











