झारखंड :रांची. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि कृषि क्षेत्र और झारखण्ड के किसानों के सर्वांगीण विकास के लिये मुख्यमंत्री हेमंत सोरएवंकी दूरदर्शिता के तहत राज्य सरकार द्वारा किये गये आज के दोनों परस्पर समझौते एमओयू का
अद्भुत एवं दूरगामी परिणाम होगा.
आज विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यालय कक्ष में आयोजित एक समारोह में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभागके तहत दो परस्पर सहमति पत्रों (एम.ओ.यू). पर हस्ताक्षर के बाद श्रीमती तिर्की ने कहा कि एक ओर जहाँ कांके, रांची की बेकन फैक्ट्री के बहुप्रतीक्षित पुनरुद्धार का रास्ता खुल गया है वहीं दूसरी ओर झारखण्ड में फल, सब्जी, सजावटी, औषधीय पौधे, मशरूम आदि फसलों की उत्पादकता, गुणवत्ता और मूल्य संवर्धन संबंधी एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद इसका सीधा फायदा किसानों को होगा जिससे उनकी आय बढ़ेगी.
उन्होंने कहा कि झारखण्ड में हर एक चेहरे पर मुस्कान और अपने प्रकृति प्रदेश झारखण्ड की अनूठी व सशक्त पहचान के हित में पशुपालन को मजबूत करने और राज्य के पशुधन क्षेत्र में मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने के प्रति हेमंत सरकार पूर्ण रूप से समर्पित है.
आज हुए पहले समझौते में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं राष्ट्रीय मांस और पोल्ट्री अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-एनएमआरआई), हैदराबाद तथा पशुपालन निदेशालय, कृषि, पशुपालन एवं सहयोग विभाग, झारखण्ड ने रांची में बेकन फैक्ट्री के पुनरुद्धार और झारखण्ड में मीट क्षेत्र के व्यापक विकास के लिये परामर्श सेवाओं के लिये परस्पर सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये. इसके तहत बेकन फैक्ट्री के आधुनिकीकरण और पुनरुद्धार के लिये तकनीकी विशेषज्ञता, झारखण्ड में व्यापक मांस प्रसंस्करण के लिये बुनियादी ढांचे का विकास, मांस प्रसंस्करण में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का कार्यान्वयन, मीट क्षेत्र में स्थानीय उद्यमियों और श्रमिकों के लिए क्षमता निर्माण, मांस प्रसंस्करण क्षेत्र में विशिष्ट तकनिकी प्रशिक्षण केंद्र कि संभावना के निर्धारण के साथ ही पूरे राज्य में वैज्ञानिक पशुपालन प्रथाओं को बढ़ावा देना है.
इस अवसर पर आईसीएआर-एनएमआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम. मुथुकुमार ने कहा, कि यह सहयोग आधुनिक प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों और वैज्ञानिक प्रथाओं को पेश करके झारखण्ड के मीट क्षेत्र को बदलने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. जबकि निदेशक पशुपालन , आदित्य कुमार आनंद ने बेकन फैक्ट्री के पुनरुद्धार के प्रयास को राज्य में मीट क्षेत्र के व्यापक विकास के लिए एक उत्प्रेरक कदम बताया जिससे किसानों, उद्यमियों और उपभोक्ताओं को लाभ होगा.
इस परामर्श समझौते में मांस प्रसंस्करण में व्यापक तकनीकी मूल्यांकन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सर्वोत्तम प्रथाओं का कार्यान्वयन शामिल है.
झारखण्ड में वानिकी एवं बागवानी क्षेत्र से संबंधित दूसरे एमओयू में भी अबतक अद्भुत उपलब्धियाँ रही है. मुख्यमंत्री जी की मौजूदगी में ही आज सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के अंतर्गत उद्यान निदेशालय झारखण्ड और भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान बेंगलुरु के मध्य हुए परस्पर समझौते से राज्य के किसानों और झारखण्ड के कृषि क्षेत्र पर सकारात्मक एवं दूरगामी प्रभाव होगा. इस समझौते का मुख्य मिशन झारखण्ड में फल, सब्जी, सजावटी, औषधीय पौधे, मशरूम आदि फसलों की उत्पादकता, गुणवत्ता और उसके मूल्य को बढ़ाना है. इससे पूरे प्रदेश में प्रसंस्करण क्षेत्र का जो विकास होगा उसके कारण किसानों की आय बढ़ेगी.
इस अवसर पर मुख्य सचिव, कृषि,पशुपालन, सहकारिता विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीक़ी,डा. एम.मुथूकुमार प्रिंसिपल साइंटिस्ट ICAR NMRI हैदराबाद , डॉ ई. श्रीनिवास राव प्रिंसिपल साइंटिस्ट IIHR बेंगलुरु, कृषि विभाग के निदेशक भोर सिंह यादव, निदेशक पशुपालन आदित्य कुमार आनंद, निदेशक उद्यान माधवी मिश्रा एवं निदेशक गब्य जिशान कमर उपस्थित थे।
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