लंदन/रांची :आज लंदन के इस भरी सभागार में आयोजित, हमारे झारखंड के छात्र-छात्राओं के साथ और यहां के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ, इस छोटी सी मुलाकात में, आप सब लोग की उपस्थिति के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया, आभार प्रकट करता हूं, जोहार करता हूं। यहां आए लंदन के विभिन्न डिपार्टमेंट के सभी सदस्यगण आप सभी का भी मैं हार्दिक अभिनंदन और स्वागत करता हूं। हम पहली बार यहां आए हैं और मेरे आने से पहले हमने आप लोगों को यहां भेजा और आप लोगों के इस हिम्मत, साहस और इस उत्साह कि वजह से ही शायद हम यहां हैं। मुझे तो इस सभागार का नाम भी नहीं पता था। वेस्टमिन्स्टर चैपल। इस खूबसूरत और ऐतिहासिक सभागार में यह कार्यक्रम आयोजित है और यह बड़े सौभाग्य की बात है कि आज मुझे यहां बोलने का मौका मिल रहा है। आप सबको पता है कि झारखंड, भारत देश का एक छोटा सा राज्य है। इतिहास से भरा यह राज्य – जहां मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा, उससे पहले भगवान बिरसा मुंडा, सिदो कान्हू, चांद भैरव, फूलो झानो का संघर्ष और आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी का संघर्ष हमें देखने को मिलता है। इतिहास लिखना बहुत आसान है। इतिहास पढ़ना बहुत आसान है, पर इतिहास बनाना बहुत कठिन है। तो हमारा यह झारखंड का इतिहास भी गौरवपूर्ण इतिहास है। हमारे पूर्वज या हमारे, जो वर्षों पुरानी पीढ़ी रही है, शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाए थे, लेकिन उनमें दूरदर्शिता थी। यह बहुत दूर की चीजों को जानते थे, समझते थे और उसी अनुरूप अपने जीवन शैली और कार्यशैली को अंजाम देते थे। आज शिक्षा का एक दायरा है। बहुआयामी शिक्षा आज के इस तकनीकी युग में बहुत आवश्यक है। मेरी यही सोच रही है कि जो हमारे पूर्वज रहे हैं उनके सपनों को पूरा करें। जो उनका संघर्ष रहा, जो उनके संघर्ष का कारण था, उन वजहों का कैसे हम समाधान करें, उसके साथ हम आगे बढ़ें। आखिर उन्होंने क्यों अपनी कुर्बानियां दी? क्यों उन्होंने अपने को बलिदान किया? वह इसलिए क्योंकि वो हमें सुरक्षित करना चाहते थे। हम अपने पैरों पर खड़ा हो, हम अपने को मजबूत कर पाएं, यही उनकी सोच रही होगी। आप सबको पता है झारखंड प्रदेश में शिक्षा को लेकर कितनी चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों के बीच में आप सबको यह भी पता होगा कि हम लोग लगातार शिक्षा के क्षेत्र में, कहा जाए कि आने वाली पीढ़ी को, कैसे सशक्त करें, कैसे उनको अपने पैरों पर खड़ा करें। वह सब इसके लिए नहीं कि सरकारी नौकरी चाहिए। हम उनको इस कदर तराशना चाहते हैं कि देश दुनिया का कोई भी कंपटीटिव, सिचुएशन हो, वो उसका सामना कर पाए। जो आज का वक्त है, उसके साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। आज हम लोगों ने स्कूली स्तर पर सीएम स्कूल ऑफ एक्सेलेंस प्रारंभ किया है। आज हमारे बच्चों को जो हायर एजुकेशन – चाहे वो टेक्निकल हो, मेडिकल हो या प्रोफेशनल कोई कोर्सेस हो, उन सबके लिए, बड़े पैमाने पर हम लोगों ने दरवाजे खोले हैं। आप सबको पता है कि हमारे घर-परिवारों में बेहतर शिक्षा के लिए जो संसाधन की आवश्यकता है, कितनी चुनौती भरा है। आज सभी प्रोफेशनल कोर्सेस के लिए हम लोगों ने गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड को भी लॉन्च किया है, जिसके माध्यम से ₹15 लाख तक का आर्थिक सहायता बैंकों के माध्यम से बिना किसी कोलेटरल के उनको बैंक सहायता करती है और वो भी बहुत कम रेट ऑफ इंटरेस्ट में। यह आर्थिक सहायता वह तब तक उनको नहीं देना है जब तक उनकी पढ़ाई पूरी ना हो जाए। वह कोर्स चार साल का हो, चाहे वो पांच साल का। पांच साल के बाद एक साल और उनको गैप मिलेगा। उसके बाद जब आपकी नौकरी लग जाएगी तब आप धीरे-धीरे बैंक को वापस कर सकते हैं। अब हमने यह व्यवस्था बनानी शुरू कर दी है शिक्षा को लेकर। किसी भी परिवार में – चाहे वह लड़के हों , लड़कियां हों , उनके बीच में आर्थिक अड़चन कभी न आए। आज आप सब लोग को यहां भेजने का उद्देश्य, आर्थिक मदद का यह नहीं कि आपको आर्थिक सहायता के माध्यम से यहां तक भेजा जा रहा है। बल्कि आपकी जो क्षमता है , उस क्षमता को हम और ताकत देना चाहते हैं। आप उन ऊचाइयों तक जाएं जहां तक आप जा सके। यह ईंधन का काम कर रहा है। ईंधन पूरे मशीन का एक पार्ट है। यह आपकी क्षमता पर निर्भर करता है कि एक संसाधन के माध्यम से आप और कितनी चीजों को मजबूत कर सकते हैं। विशेषकर मैं लंदन में आज जो हम लोगों ने सुबह मुलाकात की सीमा मल्होत्रा जी से जो ब्रिटिश सरकार में मिनिस्टर भी हैं, और शेवनिंग भी देखती हैं। मैं उनका विशेष रूप से शुक्रिया अदा करूंगा कि उनके माध्यम से हम आज यहां जो इस मंच पर खड़े हैं, इनमें उनका बहुत बड़ा योगदान है। उसके लिए मैं उन्हें तहेदिल से बहुत-बहुत शुक्रिया अदा करता हूं। उनके डेलिगेट्स भी यहां है, उनके माध्यम से जरूर यह संदेश जाए। यहां आज एक और नया रास्ता हम लोगों ने जिंदल समूह के साथ भी जोड़ने का प्रयास किया है। हमारे पास सब कुछ है। हमारे पास कोई ऐसी चीजें नहीं है जो हमें आगे बढ़ने से रोक सकता है। बशर्ते जो दरवाजे बंद हैं, वह पहले खुल नहीं पाए, नीतियां नहीं बन पाई। संसाधन के मामले में हम अपने देश में कई राज्यों से आगे हैं। बस हम कमजोर पड़ते हैं कहां? बौद्धिक रूप से। आज इसी बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने के लिए हमारा पूरा प्रयास है। आप लोग का बहुत बहुत शुक्रिया। आप लोग को बहुत सारी शुभकामनाएं। यह साल हमारा सिल्वर जुबली भी है। 25 साल का हो गया हमारा झारखंड प्रदेश। 25 साल के इस युवा राज्य में पूरी ताकत है, पूरी क्षमता है। इ नौजवान राज्य की क्षमता को मैं एक पॉजिटिव डायरेक्शन में ले जाने का कोशिश कर रहा हूं, क्योंकि अगर लक्ष्य ठीक से नहीं साधा गया तो पूरी मेहनत पानी में चला जाएगी। इसीलिए आप सब लोग आज यहां है, कल आपके जैसे और नौजवान यहां होंगे। आज आप सब लोगों को यहां देखकर मुझे जो आत्म संतुष्टि है, मैं उसको बयान नहीं कर सकता। मैं आज यहाँ हिंदी में भाषण दे रहा हूं, लेकिन आपको अंग्रेजी में भाषण देते हुए देख मुझे गौरव महसूस हो रहा है। आप हमारे प्रतिनिधि के रूप में यहां बातों को रख रहे हैं, और हम चाहते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ी इसी तरीके से आगे और तरक्की करें, यह हमारी शुभकामनाएं हैं। इस 25 साल के बाद हम अगले 25 साल के लिए आने वाली पीढ़ी के लिए – लंबे और मजबूत रोडमैप के साथ आगे आयेंगे। यह पहला कदम है, एक ट्राइबल स्टेट से एक ट्राइबल रिप्रेजेंटेटिव, दावोस से लेकर लंदन तक पहुंचा है, तो निश्चित रूप से आगे भी जायेंगे और आत्म विश्वास के साथ जायेंगे। हम लोगों का राज्य इतना मिलनसार, शांत स्वभाव का है। जहां हमारे लोग झारखंड के बारे में यह कहते हैं कि बोलना ही संगीत है, चलना ही नृत्य है। हमारे यहां द्वेष की कोई जगह है। हमारे लिए सद्भाव, प्रेम और सबके साथ चलना यही हमारा स्वभाव है। इसीलिए हम अपने पुराने विरासत को साथ संभालते हुए हम आगे बढ़े, यही हमारी शुभकामनाएं हैं। यह नया साल भी है। 2026 का पहला जनवरी का माह भी है। नए साल पर मेरी ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं। *धन्यवाद। जोहार।*
मुख्यमंत्री ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ऑल सोल्स कॉलेज का किया दौरा !
ऑक्सफोर्ड/लंदन/रांची मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ऑल सोल्स कॉलेज का दौरा किया। इस क्रम में उन्होंने भारत के...











