रांची :नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज़, इंडिया (नासी) के झारखंड चैप्टर ने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा के सहयोग से शुक्रवार को एआईसीटीई आईडिया लैब, बीआईटी मेसरा, रांची में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 को अत्यंत उत्साह एवं शैक्षणिक गरिमा के साथ मनाया। इस वर्ष के आयोजन की थीम “विज्ञान में महिलाएँ: विकसित भारत को गति देने वाली शक्ति” रही, जिसमें राष्ट्र निर्माण में महिला शोधकर्ताओं की विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के माध्यम से भूमिका को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के महत्व तथा सी. वी. रमन के जीवन एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों पर आधारित एक जानकारीपूर्ण वीडियो के साथ हुआ। रमन प्रभाव की खोज के लिए भारत को विज्ञान के क्षेत्र में पहला नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था। यह वीडियो विशेष रूप से कार्यक्रम में उपस्थित युवा महिला शोधार्थियों के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।
विभिन्न विभागों की महिला शोधार्थियों को विशेष रूप से इस आयोजन में आमंत्रित किया गया। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों पर आधारित एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक विरासत एवं समकालीन अनुसंधान संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। प्रतियोगिता में उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे शोधार्थियों की व्यापक वैज्ञानिक रुचि स्पष्ट हुई।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण एआईसीटीई आईडिया लैब, बीआईटी मेसरा में उपलब्ध उन्नत सुविधाओं एवं उपकरणों का तकनीकी भ्रमण रहा। शोधार्थियों को विभिन्न प्रोटोटाइप निर्माण एवं फैब्रिकेशन उपकरणों का प्रदर्शन कराया गया तथा यह बताया गया कि इन सुविधाओं का उपयोग शोध-आधारित प्रोटोटाइप एवं ट्रांसलेशनल तकनीकों के विकास में किस प्रकार किया जा सकता है। इसका उद्देश्य महिला शोधकर्ताओं को सैद्धांतिक अनुसंधान से व्यावहारिक उत्पाद विकास की दिशा में प्रेरित करना था, जिससे नवाचार-आधारित विकास को बल मिल सके।
इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक डॉ. प्रियंक कुमार ने कहा कि आधुनिक अवसंरचना एवं मार्गदर्शन के माध्यम से महिला वैज्ञानिकों को सशक्त बनाना आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आईडिया लैब एक ऐसा मंच प्रदान करता है जहाँ विचारों को कार्यशील मॉडल में बदला जा सकता है और महिला शोधार्थियों को अनुसंधान एवं उद्यमिता के लिए इस सुविधा का पूर्ण उपयोग करना चाहिए।
कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. सुकल्याण चक्रवर्ती ने आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान में अंतर्विषयी सहयोग एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम शैक्षणिक अनुसंधान और वास्तविक जीवन की तकनीकी आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करते हैं।
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