रांची :कुष्ठ रोग अब लाइलाज नहीं है, यदि समय पर इसकी पहचान हो जाए तो इसे पूर्णतः से ठीक किया जा सकता है। सही समय पर ईलाज आरंभ हो जाने से दिव्यांगता से भी बचा जा सकता है। यह बातें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक, शशि प्रकाश झा ने कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम को लेकर गुरूवार को मीडिया कर्मियों के लिए आयोजित राज्यस्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम का आयोजन नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के आरसीएच सभागार में किया गया था। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोगियों को छूने या उनके साथ रहने से यह बीमारी नहीं फैलती, इसलिए इस कार्यक्रम का नाम स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान रखा गया है। उन्होने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर राज्य भर में स्पर्श कुष्ठ जागरूकता पखवाड़ा कार्यक्रम का शुभारंभ 30 जनवरी 2026 से होगा। 13 फरवरी तक चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान गांव-गांव में व्यापक जागरूकता अभियान के माध्यम से आमजनों को कुष्ठ की रोकथाम और भ्रांतियों के बारे में बताया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष का थीम भेदभाव का अंत और आत्मसम्मान को सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग खोज अभियान का द्वितीय चरण 09 मार्च से 23 मार्च तक चलेगा।
पिछले वर्ष के अप्रैल महीने तक राज्यभर में 5267 कुष्ठ के नए मरीज मिले हैं । राज्यभर में 6587 कुष्ठ रोगियों का इलाज चल रहा है। अभियान निदेशक ने जोर देते हुए कहा कि कुष्ठ रोग का संपूर्ण इलाज, जांच एवं दवा राज्य के सभी सरकारी अस्पताल में निःशुल्क उपलब्ध है।
कार्यक्रम में आई.ई.सी. कोषांग के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डाॅ0 राहुल किशोर सिंह, राज्य कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डाॅ0 अनिल कुमार, गैर संचारी रोग के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डाॅ0 लाल मांझी सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मी मौजूद थे।
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