रांची :रांची में आयोजित दो दिवसीय बहुभाषी शिक्षा कॉन्क्लेव के दूसरे दिन राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) एवं जनजातीय अनुसंधान संस्थान (TRI) के विशेषज्ञों ने बहुभाषी शिक्षा की आवश्यकता, व्यवहारिक चुनौतियों और प्रभावी क्रियान्वयन पर अपने विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने मातृभाषा आधारित शिक्षा को बच्चों की समझ, सीखने की निरंतरता और शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।सत्रों के दौरान झारखंड जैसे बहुभाषी राज्य में स्थानीय भाषाओं को कक्षा शिक्षण से जोड़ने, शिक्षकों के प्रशिक्षण, पाठ्यसामग्री विकास और सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि बहुभाषी शिक्षा न केवल बच्चो के शैक्षणिक विकास को बेहतर बनाती है, बल्कि बच्चों की सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास को भी मजबूत करती है। कॉन्क्लेव के तकनीकी सत्र में उपस्थित शिक्षकों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों ने बहुभाषी शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न राज्यों में किए जा रहे नवाचारों, चुनौतियों एवं सफल प्रयोगों पर आधारित प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतीकरणों के माध्यम से मातृभाषा आधारित शिक्षण की प्रभावशीलता, बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में सुधार तथा स्थानीय संदर्भों को कक्षा शिक्षण से जोड़ने के अनुभव साझा किए गए।
NCERT की प्रो. उषा शर्मा ने NCERT द्वारा बहुभाषी शिक्षा के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में मातृभाषा आधारित शिक्षण, बहुभाषी पाठ्यसामग्री के विकास, शिक्षक प्रशिक्षण एवं कक्षा स्तर पर बहुभाषी दृष्टिकोण को लागू करने की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा में शिक्षा बच्चों की समझ और सीखने की गति को सुदृढ़ करती है। पैनल चर्चा में नारायण भगत, चिन्मयी साहू, अनिमा रानी टोप्पो, डॉ. दमयंती सिंकू और रत्नेश कुमार ने कक्षा शिक्षण में मातृभाषा के एकीकरण के नवाचार विषय पर अपने अनुभव एवं विचार साझा किए। पैनल सदस्यों ने बताया कि मातृभाषा के माध्यम से शिक्षण से बच्चों की सहभागिता बढ़ती है, सीखने में सहजता आती है तथा भाषा और विषयवस्तु की समझ अधिक प्रभावी होती है। उन्होंने विभिन्न राज्यों एवं विद्यालयों में किए जा रहे सफल प्रयोगों का भी उल्लेख किया।
विशेषज्ञों के साथ आयोजित खुली चर्चा के दौरान राज्य परियोजना निदेशक श्री शशि रंजन एवं राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. अविनव कुमार भी उपस्थित रहे। खुली चर्चा के दौरान राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने कहा कि बहुभाषी शिक्षा झारखंड जैसे भाषाई विविधता वाले राज्य में बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विद्यालय स्तर पर मातृभाषा आधारित शिक्षण को सुदृढ़ करने, शिक्षकों को व्यवहारिक प्रशिक्षण देने तथा स्थानीय भाषाओं को शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने कहा कि यूनिसेफ एवं एलएलएफ के सहयोग से झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा राज्य में क्रियान्वित पलाश कार्यक्रम का विस्तार चरणबद्ध तरीके से अन्य जिलों में भी किया जाएगा। राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. अविनव कुमार ने कहा कि बहुभाषी शिक्षा बच्चों के सीखने को अधिक सहज, समावेशी और प्रभावी बनाती है। उन्होंने बताया कि कक्षा शिक्षण में मातृभाषा के उपयोग से बच्चों की अवधारणात्मक समझ मजबूत होती है और ड्रॉपआउट की संभावना कम होती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में बहुभाषी शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यसामग्री विकास तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञ चर्चा में एलएलएफ के संस्थापक धीर झिंगरन, यूनिसेफ की शिक्षा विशेषज्ञ पारुल शर्मा, रूम तू रीड की कंट्री डायरेक्टर श्रीमती पूर्णिमा गर्ग, जामिया मालिया यूनिवर्सिटी की प्रो. डॉ. अनुभा राजेश समेत विभिन्न राज्यों से आये शिक्षकों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञ शामिल हुए।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार नेन्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक को झारखंड राज्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ दिलाई !
रांची :राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज लोक भवन स्थित बिरसा मंडप में न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक को झारखंड राज्य...











