महाराष्ट्र :मालेगांव में चुनाव प्रचार के दौरान डिप्टी सीएम अजित पवार का बयान—“जनता के पास वोट हैं और मेरे पास फंड”—अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। उन्होंने मंच से कहा कि अगर लोग उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को जीत दिलाएंगे, तो शहर में विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं होने देंगे। लेकिन अगर जनता साथ नहीं देगी, तो वे भी कोई मदद नहीं करेंगे।
इस बयान ने विपक्ष में खलबली मचा दी है। विपक्ष ने इसे खुली धमकी बताते हुए कहा कि जनता का वोट अधिकार है और विकास निधि किसी नेता की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि लोगों के टैक्स का पैसा है। इसलिए चुनाव आयोग को इस पर गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए।
अजित पवार के बयान पर उठे विवाद के बीच, विपक्ष ने किसानों की बदहाली और सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। मराठवाड़ा में हालात इतने खराब हैं कि पिछले दस महीनों में सैकड़ों किसानों ने आत्महत्या कर ली, वहीं बारिश और फसल नुकसान के बाद भी राहत ज्यादातर किसानों तक नहीं पहुंची।
इसी बीच, कई नेताओं के शिवसेना छोड़ने की खबरों और स्थानीय गठबंधनों ने मालेगांव का चुनावी माहौल और भी रोचक बना दिया है।
विवाद बढ़ने पर अजित पवार ने सफाई दी है।
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