नई दिल्ली :केंद्रीय बजट 2026–27 में महिला सशक्तिकरण को सार्वजनिक नीति और सार्वजनिक वित्त के केंद्र में रखते हुए जेंडर बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। पिछले बजट में जहाँ जेंडर बजट 8.86% था, वहीं इसे बढ़ाकर 9.37% किया गया है। इसके साथ ही जेंडर बजट का कुल प्रावधान अब तक के सर्वाधिक स्तर पर (5 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आवंटन) पहुँच गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार महिलाओं और बालिकाओं के जीवन-चक्र के हर चरण में निवेश को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार का यह बजट Women-Led Development के संकल्प को नई मजबूती देता है- जहाँ महिलाएँ केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की हर नीति और निर्णय में भागीदार हैं। यह बजट महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा, कौशल, उद्यमिता और रोजगार- हर आयाम को समग्र रूप से सशक्त करने की दिशा में ठोस कदम है।
पिछले 12 वर्षों में सरकार के सशक्त, स्पष्ट और दूरदर्शी निर्णयों के चलते भारत की अर्थव्यवस्था ने निरंतर प्रगति की है। केंद्रीय बजट 2026–27 इसी निरंतरता का प्रमाण है- जो 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को गति देता है और आर्थिक स्थिरता, सामाजिक न्याय तथा अवसरों के विस्तार पर केंद्रित है। यह बजट गरीबों के सशक्तिकरण, मध्यम वर्ग के विश्वास और युवाओं के सपनों को एक साथ आगे बढ़ाता है।
यह बजट झारखंड और उत्तर-पूर्व के प्रति सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। विकसित भारत के लक्ष्य और युवा शक्ति पर भरोसे के साथ आगे बढ़ने वाला यह भविष्य-मुखी बजट, क्षेत्रीय संतुलन और समावेशी विकास को प्राथमिकता देता है।
झारखंड के लिए बजट स्वास्थ्य संरचना को नई मजबूती प्रदान करता है। रांची और तेजपुर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का क्षेत्रीय शीर्ष संस्थानों के रूप में उन्नयन तथा जिला अस्पतालों में इमरजेंसी व ट्रॉमा केयर क्षमता को 50% तक सुदृढ़ करने का प्रस्ताव- यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता है और इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखेगा।
उत्तर-पूर्व और ‘पूर्वोदय’ राज्यों पर विशेष ध्यान इस बजट की पहचान है। दुर्गापुर नोड के साथ एकीकृत ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, पाँच पूर्वोदय राज्यों में पाँच पर्यटन स्थलों का विकास और 4,000 ई-बसों की व्यवस्था- ये पहलें रोजगार, कनेक्टिविटी और हरित भविष्य को एक साथ आगे बढ़ाती हैं।
अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट विकास योजना के अंतर्गत मंदिर-मठों का संरक्षण, बेहतर कनेक्टिविटी और तीर्थयात्रियों की सुविधाएँ—स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत दोनों को सशक्त करेंगी।
ग्रामीण आजीविका और किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन क्षेत्र में उद्यमिता विकास पर जोर दिया गया है। क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी, पशुधन FPO और उद्यमों के आधुनिकीकरण से स्थायी आय और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
हर जिले में एक बालिका छात्रावास की स्थापना से बेटियों के उच्च शिक्षा के सपनों को नई उड़ान मिलेगी। साथ ही, लखपति दीदी पहल के विस्तार के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को ‘SHE – Self Help Entrepreneurs’ के रूप में सशक्त किया जाएगा। स्थानीय उद्यमों को बाज़ार से जोड़कर महिलाओं की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। यह बजट आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करता है, निवेश और नवाचार के नए द्वार खोलता है और यह भरोसा देता है कि भारत का विकास समावेशी भी होगा और स्थायी भी।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026–27 देश के विकास की गति को तेज़ करने, युवाओं के विश्वास को सशक्त करने और विकसित भारत के संकल्प को ठोस आधार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं पर केंद्रित आज की नीतियाँ आने वाले भारत को अधिक सशक्त, समावेशी और आत्मनिर्भर बनाएँगी।














