रांची : देश की सरकार किसके हाथ में है नरेंद्र मोदी या डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में। देश विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है देश में जो हो रहा है वह रहस्यमय तरीके से हो रहा है आम लोगों को कुछ पता नहीं चल रहा।
केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में किए गए यूएस ट्रेड डील के संदर्भ में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव प्रानव झा ने कांग्रेस भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यूएस ट्रेड डील अमेरिकी हित में जबरदस्त डील है,इसमें भारत के लिए नुकसान है। एपस्टिन फाइल में मोदी सरकार के मंत्री का नाम आना और अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी पर कसते शिकंजे के दबाव में यह डील संभव हो सका और सरकर इंडिया 6 गुना टैरिफ बढ़ने की खुशी मना रही है।
2025 में अमेरिका को हमारा निर्यात 86 बिलियन डॉलर एवं आयात 46 बिलियन डॉलर था 40 बिलियन ट्रेड सरप्लस था,अब अमेरिका से 100 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त सामान खरीदना है सरप्लस ट्रेड डेफिसिट ट्रेड में बदल जाएगा,चीन के साथ पहले ही 116 बिलियन का व्यापार घाटा है। कृषि क्षेत्र को भी अमेरिकी किसानों के लिए खोल दिया गया है अमेरिकी किसानों को 64 लाख रुपए सब्सिडी प्रतिवर्ष मिलती है जबकि भारतीय किसानों को मुश्किल से ₹12000 प्रतिवर्ष।
कपास किसानों के लिए यह ट्रेड डील तबाही की तरह है अमेरिका ने हमारे टेक्सटाइल और कपड़ों पर 18% और बांग्लादेश पर 0% टैरिफ लगाया है अगर बांग्लादेश अमेरिका का कपास खरीदेगा तो उसे कपड़े पर 0% टैरिफ लगेगा भारत से एक्सपोर्ट होने वाले कुल कपास का 75% बांग्लादेश खरीदता है अब यही कपास जीरो प्रतिशत टैरिफ पर बांग्लादेश अमेरिका से खरीदेगा सीधा भारत के कपास किसानों के लिए तबाही का डील है।
अमेरिका के हुक्म पर रुस से तेल खरीदना भारत बंद कर देगा जबकि अपनी जरूरत का 40% सस्ता तेल भारत अभी रुस से खरीदता था। अब अमेरिकी आदेश पर वेनेजुएला से खरीदेगा और अमेरिका इसकी निगरानी भी करेगा।हम जानना चाहते हैं कि क्या इस डील से पहले राज्यों से व्यापक परामर्श किया गया, क्या देख संसद में इस समझौते की पूरी शर्तें सार्वजनिक की जाएगी, किसानों छोटे उद्योगों की हितों की रक्षा के लिए क्या उपाय किए गए हैं,झारखंड जैसे खनन आधारित राज्यों के लिए क्या विशेष प्रावधान है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि इस ट्रेड डील में देश की संप्रभुता स्वतंत्रता के साथ खिलवाड़ किया गया है।मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को भयानक अराजकता में धकेलने वाले समझौते किए हैं।2014 के पहले मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी का 17% तक हुआ करता था जो अब घटकर 12.50 प्रतिशत रह गया है सरकार का मेक इन इंडिया कार्यक्रम इंपोर्ट फ्रॉम एब्रॉड बनकर रह जाएगा।
संवाददाता सम्मेलन में श्री रविंद्र सिंह राकेश सिन्हा सतीश पॉल मुजनी सोनाल शांति रियाजुल अंसारी भी अपस्थित थे।
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