रांची :नगड़ी के रानी चुआं में सोमवार को विवेकानंद जयंती के मौके पर कवियों ने हर रस की कविता पढ़ कर माहौल बना दिया। उपस्थित श्रोताओं ने कवियों की खूब हौसलाअफजाई की। गौरतलब है कि सोमवार से ही स्वर्णरेखा महोत्सव का भी आगाज हुआ है।
कवि सम्मेलन की शुरुआत कमल आग्नेय की वीर रस की कविता से हुई। उन्होंने अपनी कविता में आज़ादी की गाथा का जिक्र किया। इसके बाद कवि ओंकार कश्यप ने भी वीर रस की कविता पढ़ी। बोल थेः नीति न्याय के लिए हुआ तो युद्ध नहीं बेमानी है, सीमा पर उतना रुधिर बहा, जितना झेलम में पानी है। इसके बाद अंकिता सिन्हा ने सिंगार रस की कविता पढ़ी। उत्तम लाईकर ने ग्रामीण संस्कृति के तथ्य पर आधारित कविता पढ़ पाठकों को सहसा खुद से जोड़ लिया। उत्कर्ष उत्तम ने हास्य रस की कविताएं पढ़-पढ़ कर लोगों को ठठाकर हंसाया। चंदन प्रजापति ने झारखंड गीत सह हर हाथ से हसवा निकलेगा, हर सांस में बिरसा चमकेगा सुनाया। मेजर संजय ने हास्य रस की कविता में श्रोताओं को डुबो दिया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता स्वर्णरेखा महोत्सव समिति के अध्यक्ष तापेश्वर केशरी ने की।
इसके पूर्व मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित सेवानिवृत पुलिस उपमहानिरीक्षक संजय रंजन सिंह ने कहा कि कवि सम्मेलन में स्कूली बच्चों व बच्चियों में कविता-पाठ के प्रति जो उत्साह, आत्मविश्वास और संवेदनशीलता दिखी, वह इस बात का संकेत है कि शब्दों की ताक़त आज भी नई पीढ़ी के भीतर जीवित है। ऐसे मंच भविष्य के संवेदनशील नागरिक, सजग विचारक और सच बोलने वाले कवि गढ़ते हैं। बच्चों की आँखों में कविता के प्रति अनुराग देखना खुद में ही आशा का उत्सव है।
विशिष्ट अतिथि समाजसेवी धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि संस्कृति और समाज को जोड़ने में कविता अहम भूमिका निभाती है। कविता मनोरंजन के साथ-साथ भाषा-संस्कृति को बढ़ावा देती है, नवोदित कवियों को मंच देती है, सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाती है और लोगों को एकजुट करती है।
इस मौके पर समिति के कार्यकारी अध्यक्ष बजरंग महतो, महामंत्री हेमंत केशरी, जिला परिषद सदस्य पूनम देवी समेत कई काव्य प्रेमियों ने कवियों का भरपूर उत्साहवर्धन किया। मंच संचालन संदीप राज ने किया।
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