रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रियो भट्टाचार्य प्रधानमंत्री के दौरे पर किया सवाल उनका स्वागत राज्य की जनता ने पूरे उत्साह के साथ किया.झारखंड की पहचान है कि अपने अतिथि का स्वागत पूरे बेहतर तरीके से करता है.जनता को अपेक्षा थी की राज्य वासियों को कुछ उपहार देकर जाएंगे.लेकिन जब वह यहां से लौटे तो जनता निराश दिखी.
गौरतलब है कि पिछले वर्ष जनजाति गौरव दिवस मनाने का घोषणा देश के प्रधानमंत्री ने किया था.पिछले वर्ष यहां देश की पहली आदिवासी महिला जो राष्ट्रपति है वह भी झारखंड आई थी.प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आदिवासी जनजाति के बारे में खूब भाषण दिया.लेकिन हास्यास्पद बात थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदिवासी जीवन और परंपरा के बारे में कुछ नहीं जानकारी है.झारखंड विधानसभा से सरना धर्म कोड का प्रस्ताव पास कर केंद्र कोभेजा.लेकिन यह सिर्फ आदिवासी के नाम पर राजनीति करने आते है.इन्हें आदिवासी से कोई लेना देना नहीं है.अगर प्रधानमंत्री आदिवासी के हितैषी है तो वह मणिपुर क्यों नहीं गए मणिपुर छठवीं अनुसूची में आता है.मिजोरम में चुनाव है वहां भी प्रधानमंत्री नहीं दिखे.तो क्या यह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ चुनाव को देख कर झारखंड के उलिहातू को चुना.भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर राजनीति करने झारखंड को चुना था.स्थापना दिवस पर राज्य सरकार ने कई योजनाओं की घोषणा की.इन योजनाओं से राज्य के युवाओं युवतियों की जिंदगी बदलने वाली योजना है.हमने बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने का काम किया.इसी से प्रधानमंत्री परेशान थे,वह सोच रहे थे कि अगर इसे रोकना है तो उन्हें खुद झारखंड आना होगा,और प्रधानमंत्री जान बूझ कर झारखंड पहुंचे हाथ हिलाते हुए रोड शो करते दिखे फ़ोटो शूट करा कर झारखंड पहुंचे थे.यह कोई पहला साल नहीं है पिछले साल भी राज्य के स्थापना दिवस के दिन राष्ट्रपति झारखंड पहुंची,स्वीकृति के बाद भी राष्ट्रपति राज्य सरकार के कार्यक्रम में नहीं पहुंची थी.सरकार का एक मोटो है कि राज्य सरकार के कार्यक्रम के दिन खुद पहुंच कर कार्यक्रम को फीका करना है.अब तक सरकार को अस्थिर करने के लिए ईडी,सीबीआई और आईटी पहुंचती थी लेकिन अब पीएम खुद पहुंच रहे है.राज्यपाल ने अपने भाषण में जिक्र किया कि जब चुनाव में जाये तो राजनीति लड़ाई लड़े बाकी जब शासन करे तो विकास के नाम पर करना होगा.राज्यपाल ने प्रधानमंत्री की मेजबानी की तो क्यों प्रधानमंत्री को झारखंड में मौजूद एचईसी को बचाने की फरियाद लगा दी.अब भाजपा सरकार के पैसे से अपना एजेंडा तय कर प्रचार करने में लगे है.एचईसी पर प्रधानमंत्री की चुप्पी घातक है.भाजपा ने जैसे सभी उद्योग को बेच दिया,वैसे ही एचईसी को भी अडानी को देने की योजना है.कम से कम अपने जुबान से यह बोल देते की अपने मित्र अडानी को एचईसी बेच देंगे इससे साफ हो जाता कि आप बचाने वाले नहीं बेचने वाले है.भाजपा आदिवासी को बचाने की बात करती है लेकिन उन्हें आदिवासी नाम से चिढ़ है.कॉरपोरेट योजना लाकर जंगल को कॉरपोरेट को देने की योजना है.जंगल बेच कर आदिवासी को कैसे बचाने की बात करतें है.












