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Home » झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आदिवासी सरना धर्म कोड पारित आग्रह !

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आदिवासी सरना धर्म कोड पारित आग्रह !

झारखण्ड के आदिवासियों की विशलेषण जनसंख्या का प्रतिशत झारखण्ड में 38 से घटकर 26 प्रतिशत ही रह गया है .

First Report Live Desk by First Report Live Desk
2 years ago
in झारखंड, पॉलिटिक्स, रांची
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झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आदिवासी सरना धर्म कोड पारित आग्रह !
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रांची : भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आदिवासियों के हित में आदिवासी सरना धर्म कोड पारित करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने पत्र के माध्यम से कहा कि हम आदिवासी समाज के लोग प्राचीन परंपराओं एवं प्रकृति के उपासक हैं तथा पेड़ों, पहाड़ों की पूजा और जंगलों को संरक्षण देने को ही अपना धर्म मानते हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 12 करोड़ आदिवासी निवास करते हैं। झारखंड प्रदेश जिसका मैं प्रतिनिधित्व करता हूँ एक आदिवासी बाहुल्य राज्य है, जहाँ इनकी संख्या एक करोड़ से भी अधिक है।

देश का आदिवासी समुदाय पिछले कई वर्षों से अपने धार्मिक अस्तित्व की रक्षा के लिए जनगणना कोड में प्रकृति पूजक आदिवासी/सरना धर्मावलंबियों को शामिल करने की मांग को लेकर संघर्षरत है।
मैंने पत्र लिखकर माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री @narendramodi जी से देश के करोड़ों आदिवासियों के हित… pic.twitter.com/svvzDaTq7C

— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) September 27, 2023

झारखंड की एक बड़ी आबादी सरना धर्म को मानने वाली है। इस प्राचीनतम सरना धर्म का जीता-जागता ग्रंथ स्वंय जल, जंगल, जमीन एवं प्रकृति हैं। सरना धर्म की संस्कृति, पूजा पद्धति, आदर्श एवं मान्यताएँ प्रचलित सभी धर्मों से अलग है।झारखंड ही नहीं अपितु पूरे देश का आदिवासी समुदाय पिछले कई वर्षों से अपने धार्मिक अस्तित्व की रक्षा के लिए जनगणना कोड में प्रकृति पूजक आदिवासी सरना धर्मावलंबियों को शामिल करने की माँग को लेकर संघर्षरत है। प्रकृति पर आधारित आदिवासियों के पारंपरिक धार्मिक अस्तित्व के रक्षा की चिंता निश्चित तौर पर एक गंभीर सवाल है। आज आदिवासी सरना धर्म कोड की माँग इसलिए उठ रही है ताकि प्रकृति का उपासक यह आदिवासी समुदाय अपनी पहचान के प्रति आश्वस्त हो सके। वर्तमान में जब समान नागरिक संहिता की माँग कतिपय संगठनों द्वारा उठाई जा रही है, तो आदिवासी सरना समुदाय की इस माँग पर सकारात्मक पहल उनके संरक्षण के लिए नितांत ही आवश्यक है। आप अवगत हैं कि आदिवासी समुदाय में भी कई ऐसे समुह हैं जो विलुप्ति के कगार पर हैं एवं सामाजिक न्याय के सिद्धांत पर इनका संरक्षण नहीं किया गया तो इनकी भाषा, संस्कृति के साथ-साथ इनका अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा। विगत आठ दशकों में झारखण्ड के आदिवासियों की जनसंख्या के विशलेषण इनकी जनसंख्या का प्रतिशत झारखण्ड में 38 से घटकर 26 प्रतिशत ही रह गया है। इनकी जनसख्या के प्रतिशत में इस तरह लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है जिसके फलस्वरुप संविधान की पाँचवी एवं छठी अनुसूची के अंतर्गत आदिवासी विकास की नीतियों में प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है परिस्थितियों के मद्देनजर हिन्दू मुस्लिम, सिख, इसाई, जैन धर्मावलम्बियों से अलग सरना अथवा प्रकृति पूजक आदिवासियों की पहचान के लिए तथा उनके संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए अलग आदिवासी सरना कोड अत्यावश्यक है। अगर यह कोड मिल जाता है तो इनकी जनसंख्या का स्पष्ट आकलन हो सकेगा एवं तत्पश्चात हम आदिवासियों की भाषा, संस्कृति, इतिहास का संरक्षण एवं संवर्द्धन हो पाएगा तथा हमारे संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जा सकेगी। यहाँ उल्लेखनीय है कि वर्ष 1951 के जनगणना के कॉलम में इनके लिए अलग कोड की व्यवस्था थी परन्तु कतिपय कारणों से बाद के दशकों में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई। आदिवासी सरना कोड आदिवासी समुदाय के समुचित विकास के लिए अत्यंत ही आवश्यक एवं इसके मद्देनजर झारखंड विधानसभा से इस निमित्त प्रस्ताव भी पारित कराया गया है, जो वर्तमान में केंद्र सरकार के स्तर पर निर्णय हेतु लंबित है। अपने आदिवासी होने पर गर्व है और एक आदिवासी मुख्यमंत्री होने के नाते मैं ना सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे देश के आदिवासियों के हित में आपसे विनम्र आग्रह करता हूँ कि हम आदिवासियों की इस आदिवासी सरना धर्म कोड की चिरप्रतीक्षित माँग पर आप यथाशीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की कृपा करें। आज पूरा विश्व बढ़ते प्रदूषण एवं पर्यावरण की रक्षा को लेकर चिंतित है, वैसे समय में जिस धर्म की आत्मा ही प्रकृति एवं पर्यावरण की रक्षा है उसको मान्यता मिलने से भारत ही नहीं पूरे विश्व में प्रकृति प्रेम का संदेश फैलेगा।

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Tags: #Jharkhand #CM Hemant Soren # wrote a letter to the # Prime Minister requesting to #pass the Tribal Sarna Dharma Code
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