रांची : युगांतर भारती, नव चेतना ग्रामीण संस्थान, नेचर फाउंडेशन, स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट, जल जागरूकता अभियान के संयुक्त तत्वाधान में स्वर्णरेखा महोत्सव के तीसरे और अंतिम दिन सर्वप्रथम स्वर्णरेखा नदी के उद्गमस्थल रानीचुआं में नदी का विधिविधान के साथ पूजन किया गया।
पूजन में युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण, स्वर्णरेखा महोत्सव समिति के अध्यक्ष तापेश्वर केशरी, हेमंत केशरी, संदीप राज, केदार महतो, चूड़ामणि महतो, बांदे ओरांव, दौलत राम केशरी, बजरंग महतो, रवि केशरी, अशोक ठाकुर, पूनम देवी, दीपक सिंह, शीला देवी, उमेश महतो, सुरेश साहू समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं शामिल हुए।
इस मौके पर अंशुल शरण ने स्वर्णरेखा नदी के इतिहास पर प्रकाश डाला और कहा कि महाभारत काल में पांडवों ने जब नगड़ी के इस गांव में अज्ञातवास गुजारा था, तब माता कुंती को प्यास लगी थी। तब अर्जुन ने धरती पर तीर चलाया, जिससे जमीन से जलधारा निकली थी। यही आज भी चुआं के तौर पर मौजूद है। बगल में ही एक कुआं भी है।
शरण ने कहा कि नदियां मानव सभ्यता की जननी हैं। नदियों की स्वच्छता का ख्याल हर हाल में रखना होगा। नदियां समाप्त हुई तो मानव सभ्यता भी समाप्त हो जाएगी।
अंशुल शरण ने झारखंड सरकार से माँग की कि स्वर्णरेखा महोत्सव को राजकीय मेला घोषित करे। नदी के उद्गम स्थल रानीचुआं को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए भी सरकार को पहल करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय 21वा स्वर्णरेखा महोत्सव का उद्देश्य नदी को स्वच्छ रखने और उसके संरक्षण के लिए आम जनमानस को प्रेरित करना है। इसमें नदी पूजन और सामूहिक संकल्प शामिल हैं।
शरण ने मकर संक्रांति की शुभकामना देते हुए कहा कि पर्व-त्यौहार तभी सार्थक होगा, जब नदी प्रदूषण मुक्त होकर अविरल बहती रहेगी।
उन्होंने बताया कि आज स्वर्णरेखा महोत्सव उद्गमस्थल के इलावा रांची के धुर्वा, हुंड्रू और 21 महादेव एवं जमशेदपुर के दोमुहानी, गांधी घाट, पांडे घाट, और भोजपुर घाट में भी उल्लासपूर्ण माहौल में मनाया गया।
मेले में लगे स्थानीय उत्पाद एवं खाने-पीने के स्टॉल को अतिथियों ने सराहा। मेले में दिनभर में दस हज़ार से ज्यादा स्थानीय नागरिकों ने भाग ले कर मेला को सफल बनाया। आज सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
उधर, धुर्वा सीटीओ में भी धूमधाम से स्वर्णरेखा महोत्सव आयोजित किया गया। एस एन सिन्हा एजुकेशनल ट्रस्ट के समीर सिंह ने कहा कि स्वर्णरेखा महोत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना का भी संदेश यह महोत्सव देता है। उन्होंने विधायक सरयू राय की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह महोत्सव का इक्कीसवां साल है। श्री राय ने जो स्वर्णरेखा महोत्सव रूपी एक पौधा लगाया था, वो आज एक फलदार वृक्ष बन गया है।
उन्होंने कहा कि हर समाज के लोगों की भागीदारी से यह महोत्सव साल दर साल विस्तृत रूप लेता जा रहा है।
उधर, 21 महादेव मंदिर में समाजसेवी धर्मेंद्र तिवारी ने अपनी टीम के साथ उत्साह के साथ स्वर्णरेखा महोत्सव मनाया। तिवारी ने कहा कि आज सूर्य धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश कर रहा है। सूर्य उत्तर दिशा की ओर अग्रसर है, इसलिए कहीं कहीं आज के दिन को उत्तरायण भी कहते हैं।
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