जमशेदपुर : शीत की बढ़ती ठिठुरन के बीच शहर साहित्य, संस्कृति और विचार की ऊष्मा से भरने जा रहा है. आगामी जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 में देशभर से जानी-मानी हस्तियाँ शिरकत करेंगी. इनमे एक अत्यंत विशिष्ट नाम है—देश के चर्चित खोजी पत्रकार, लेखक और पर्यावरण-विचारक सोपान जोशी.
खेती-किसानी, जल–वन–पर्यावरण, विज्ञान, यात्रा-वृत्तांत और सामाजिक दुविधाओं पर गहरी पड़ताल करने वाले सोपान जोशी की लेखनी आम जनजीवन के भीतर उतरकर उसकी धड़कनें सुनती है. उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों जल थल मल, एक था मोहन, बापू की पाती, शिव पुत्र कथा और मैंगीफेरा इंडिका: अ बायोग्राफी ऑफ द मैंगो ने पाठकों को सोचने पर मजबूर किया है. उनकी भाषा सीधी, प्रहारक और बिना अलंकार की होती है. वे प्रश्न इस तरह रखते हैं कि पाठक उनसे बच नहीं पाता.
विशेष व्याख्यान — “शब्द, समाज और सरोकार”
आयोजन के दूसरे दिन 21 दिसंबर को प्रातः 11:30 बजे से
आयोजित यह सत्र पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, शोधार्थियों एवं छात्र–छात्राओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा. सोपान जोशी अपने अनुभवों और चिंतन की रोशनी में बताएँगे कि विचार कैसे जन सरोकारों को दिशा देंगे. वे बताएंगे कि एक पत्रकार के शब्द कैसे समाज को समझने का आईना बनते हैं.
सिकुड़ती नदियों की कहानी’ — डॉ. दिनेश कुमार मिश्र का उदबोधन
देश के ख्यात नदी-विज्ञानी, लेखक और पर्यावरण-चिंतक डॉ. दिनेश कुमार मिश्र आयोजन में अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराएँगे. आईआईटी से एमटेक की उपाधि प्राप्त डॉ. मिश्र ने नदियों को सिर्फ जलधारा नहीं, बल्कि जीवनधारा के रूप में देखा और समझाया है. उनकी लेखनी नदियों की आत्मकथा है, जहाँ जल, जन और जीवन की त्रासदी, संघर्ष और सौंदर्य एक साथ बहते हैं. उनकी महत्वपूर्ण पुस्तकें
बंदिनी महानंदा, बगावत पर मजबूर मिथिला की कमला नदी, दुई पाटन के बीच में कोसी नदी की कहानी, बागमती की सद्गति इत्यादि नदी-अध्ययन और पर्यावरण साहित्य की बुनियादी कृतियाँ मानी जाती हैं.
जमशेदपुर के डॉ. दिनेश मिश्र को किया जाएगा ‘विद्यादीप जल-संस्कृति सम्मान’ से अलंकृत
फेस्टिवल के दौरान नदी-पारिस्थितिकी और पर्यावरण साहित्य में डॉ मिश्र के उत्कृष्ट योगदान के लिए विद्यादीप जल-संस्कृति सम्मान प्रदान किया जाएगा. यह सम्मान उन्हें प्रदान करेंगे खूंटी जिले के वयोवृद्ध सैनिक, पर्यावरण-पुरुष और जनजातीय समाज के प्रेरक व्यक्तित्व सोमा मुंडा.
सोमा मुंडा पाँच दशकों से जनजातीय अस्मिता, शिक्षा, जल–वन–भूमि संरक्षण और सामाजिक पुनर्जागरण के अग्रदूत रहे हैं. युद्धभूमि से अहिंसक जन-सेवा तक की उनकी यात्रा आज की पीढ़ी के लिए प्रेरक मिसाल है.
इस सत्र में सोपान जोशी स्वयं करेंगे विषय-प्रवेश
दोनों व्यक्तित्वों डॉ. मिश्र और सोमा मुंडा का परिचय और विषय का अवगाहन दिल्ली से आ रहे सोपान जोशी द्वारा किया जाएगा. सत्र में रांची के वरिष्ठ अधिवक्ता रश्मि कात्यायन की विशिष्ट उपस्थिति रहेगी.
जलकुम्भी से साड़ी बनाने वाले गौरव से होगी मुलाकात
जमशेदपुर के युवा पर्यावरण इंजीनियर गौरव आनंद ने जलकुंभी जल-घास को आजीविका और नवाचार का माध्यम बना दिया है. स्वर्णरेखा नदी की सफाई से शुरू हुआ उनका यह काम आज आजीविका,पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का एक अद्भुत मॉडल बन चुका है.
आधुनिकता के नाम पर खो रही है आत्मा- आयोजन समिति की भावपूर्ण अपील
आयोजन समिति के सदस्यों लाला मूनका और डॉ. मुदिता चंद्रा ने कहा कि “भारत की नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, वे संस्कृति, समाज और संवेदना की जीवनरेखाएँ हैं. लेकिन जब विकास के नाम पर नदियाँ बाँधी जाती हैं, जंगल उजाड़े जाते हैं, और आदिवासी अपने ही भूभाग पर विस्थापित हो जाते हैं— तब हमें स्वयं से पूछना होता है: क्या आधुनिकता के नाम पर हम अपनी आत्मा खो रहे हैं?”
जमशेदपुर शब्दों, विचारों और सरोकारों के महाकुंभ के स्वागत को तैयार है. दो दिनों का यह महोत्सव सिर्फ साहित्य नहीं, यह समाज, संवेदना और सरोकारों की पुनर्स्थापना का उत्सव है.
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने यूके की मंत्री सीमा मल्होत्रा से मुलाकात !
लंदन/रांची :मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने यूनाइटेड किंगडम सरकार की संसदीय अवर सचिव (समानता एवं इंडो-पैसिफ़िक मामलों की मंत्री) सीमा मल्होत्रा...











