रांची — झारखण्ड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने राज्य में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की धीमी प्रगति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में केसीसी के लक्ष्य की उपलब्धि अत्यंत निराशाजनक है और अब तक 25 प्रतिशत लक्ष्य भी प्राप्त नहीं हो सका है, जबकि पूर्व वर्षों में स्थिति इससे कहीं बेहतर रही है।
राजधानी रांची में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 94वीं बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि किसानों के हित में बैंकिंग क्षेत्र से जिस प्रतिबद्धता और सक्रियता की अपेक्षा है, उसका स्पष्ट अभाव देखने को मिल रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से आगामी खरीफ सीजन का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व बैठक में ही अप्रैल-मई के दौरान किसानों को समय पर केसीसी ऋण उपलब्ध कराने और राशि विमुक्त करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद वर्तमान प्रगति संतोषजनक नहीं है, जिससे किसानों को समय पर ऋण मिलने में कठिनाई की आशंका बढ़ गई है।
मंत्री ने निर्देश दिया कि प्रखण्ड स्तरीय बैंकर्स समिति (बीएलबीसी) की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि कई प्रखण्डों में ये बैठकें लंबे समय तक नहीं होती हैं, जो चिंताजनक है। एसएलबीसी को सुनिश्चित करना चाहिए कि बीएलबीसी वर्ष में निर्धारित न्यूनतम बैठकों का आयोजन करें और उनका प्रतिवेदन समय पर उपलब्ध कराएं।
कृषि मंत्री ने किसानों के लिए वित्तीय साक्षरता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों की बैंक शाखाओं में ऐसे कर्मियों की तैनाती की जाए जिन्हें स्थानीय भाषा का ज्ञान हो, ताकि किसानों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की भाषाई या संवाद संबंधी बाधा का सामना न करना पड़े।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी आय के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में अपना रहे हैं। ऐसे में बैंकों और एसएलबीसी को इस क्षेत्र में निवेश और ऋण वितरण का समुचित आकलन करना चाहिए, ताकि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
अंत में मंत्री ने जोर देकर कहा कि एसएलबीसी की बैठकों में लिए गए निर्णयों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है, और इसमें बैंकिंग क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।













