रांची :आज सदर अस्पताल रांची में स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम (SHWP) के अंतर्गत उत्कृष्ट विद्यालयों एवं उनके स्वास्थ्य आरोग्य दूत (Health & Wellness Ambassadors -HWA) को सम्मानित करने हेतु जिला स्तरीय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया l
कार्यक्रम मे 19 प्रखंडों से उत्कृष्ट कार्य कर रहे पांच पांच विद्यालयों के दो आरोग्य दूतों (शिक्षकों ) को उत्कृष्ट कार्य करने हेतु सम्मानित किया गया l
आज के कार्यक्रम में सिविल सर्जन रांची डॉ प्रभात कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी विनय कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज, राज्य नोडल पदाधिकारी आरकेएस के कार्यक्रम डॉ विजय किशोर रजक, राज्य समन्वयक रफत फरजाना, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह समेत अन्य पदाधिकारी, स्वास्थ्य कर्मी एवं शिक्षक- शिक्षिकाएं शामिल हुई l
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए सिविल सर्जन डॉ प्रभात ने बताया की समाज के साथ-साथ बच्चों को बीमारियों से बचाना हमारा दायित्व है l विद्यालय में शिक्षकों का दायित्व है कि हर बच्चों को स्वच्छता के बारे में बताएं l बच्चों को खाना खाने के पहले एवं बाद में साथ ही सौच के बाद हाथ धोने के बारे में बताएं ताकि वह बहुत सी बीमारियों से बच सके l आज बच्चे घर का पारंपरिक भोजन छोड़कर जंक फूड खा रहे हैं जिससे बच्चे बार-बार बीमार पड़ते हैं l बच्चों को घर का खाना खाने के साथ-साथ मोटे अनाज के फायदे के बारे में स्कूलों में बताया जाना चाहिए ताकि वह जंक फूड छोड़कर शुद्ध और स्वच्छ घर का खाना खाएं और स्वास्थ्य रहे l शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है ताकि हम पूर्ण रूप से स्वस्थ रह सके l आज बच्चे बहुत मानसिक रूप से तनाव में रहते हैं पढ़ाई का प्रेशर में जाकर बच्चों में आत्महत्या की प्रवृत्ति आती है l हमें विद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा करनी चाहिए एवं बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए l विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के माध्यम से किशोर-किशोरियों में जीवन कौशल निर्माण, सहपाठियों से सकारात्मक संबंध, तर्किक एवं विश्लेषण कौशल की दक्षता, निर्णय लेने,समस्या के समाधान, सकारात्मक संवाद कौशल विकसित करने की दिशा मे मजबूती मिलती हैँ
जिला शिक्षा पदाधिकारी विनय कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य हमारे डेली रूटीन का हिस्सा होना चाहिए साथ ही हमें अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में हमेशा प्रयासरत रहना चाहिए l बच्चों को यह पता होना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत, जैसे कौन सा पानी पीने योग्य है और कौन सा पानी गंदा है l तभी वह स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रह पाएंगे l सभी विद्यालय का कैंपस साफ सुथरा होना चाहिए ताकि बच्चों को एक अच्छा वातावरण मिल सके l महात्मा गांधी भी साफ सफाई एवं स्वच्छता को लेकर तत्पर रहते थे l बच्चों को संवारने में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि शिक्षक जो भी बच्चों को सिखाएंगे वह बच्चा अपने घर में जाकर सभी को बतलाता है और उसे बात पर अमल भी करता है l बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना हमारा सबसे बड़ा जिम्मेवारी है l स्वस्थ बच्चे से ही स्वस्थ देश का निर्माण हो सकता है l
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सदर अस्पताल के साफ सफाई की भी बहुत तारीफ की l
जिला शिक्षा उपाधीक्षक बादल राज ने कहा की विकास को लेकर सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन में स्कूल एवं शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं l बच्चों को शिक्षित के साथ-साथ उन्हें स्वस्थ्य बनाने की जिम्मेवारी में शिक्षक की सक्रिय भूमिका होती है l
राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ विजय किशोर रजक ने बताया कि झारखंड के 24 जिला के सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त सभी विद्यालय में कक्षा 6 से 12 तक के लगभग 15127 विद्यालय में यह कार्यक्रम संचालित किया जा रहे हैं l इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है किशोर को स्वास्थ्य एवं पोषण के बारे में उचित जानकारी प्रदान करना साथ ही सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देना l विद्यालय में सुरक्षित पेयजल के उपयोग को बढ़ावा देना एवं किशोरियों में महावारी संबंधित स्वच्छता एवं प्रबंधन की जानकारी देकर उन्हें जागरूक बनाना l बच्चों में कुपोषण एवं एनीमिया की पहचान कर उनका समुचित इलाज करना l हिंसा एवं चोट के खिलाफ सुरक्षा इसके अलावा बाल विवाह,दहेज प्रथा, मानव तस्करी,सामाजिक एवं भावनात्मक कौशल एवं सड़क सुरक्षा इत्यादि विषय पर किशोर किशोरियों को जागरूक करना
राज्य समन्वयक रफत फरजाना ने बताया कि पूरे भारत में यह कार्यक्रम 11 विषय पर चल रहा है जबकि झारखंड में अन्य पांच विषय इसमें शामिल किया गया है जैसे बाल विवाह रोड सेफ्टी मानव तस्करी दहेज प्रथा एवं सामाजिक और भावनात्मक शिक्षा l किशोर किशोरियों को इन विषयों पर जागरूक करना बहुत जरूरी है ताकि उनका पूर्ण रूप से विकास हो सके साथ ही वह जागरूक रहे l झारखंड में 100 में से 68 महिलाएं एनीमिया की शिकार है यदि हम बचपन से ही बच्चों के खान-पान पर ध्यान देंगे तो वह इन सभी समस्या से बच सकेंगे l यहां टीनएज प्रेगनेंसी ( कम उम्र में माँ बनाना ) 9% है जो की लड़कियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है l नशाखोरी इत्यादि के बारे में भी बच्चे को जानकारी देना चाहिए ताकि वे इसकी चपेट में ना सके l विद्यालय एक ऐसा माध्यम है जहां हम शिक्षकों के द्वारा इन विषयों पर बच्चों को जानकारी देकर उन्हें एक अच्छे भविष्य की ओर ले जा सकते हैं l
कार्यक्रम के अंत में रांची जिला के सभी प्रखंडों से पांच- पांच उत्कृष्ट विद्यालयों के उत्कृष्ट 190 आरोग्य दूतों को सम्मानित किया गया l
कार्यक्रम के समापन में जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया l साथ ही सेंटर फॉर कैटालाइजिंग चेंज (सी -3) के द्वारा कार्यक्रम को सफल बनाने में तकनीकी सहयोग दिया गया।













