रांची : झारखंड प्रदेश का 24 वां बजट पेश होगा 2000 नवंबर मे इस राज्य का गठन हुआ, और 2001 से ही यहां बजट पेश होना शुरू हुआ। हमलोग चुनाव से पहले ही जिस बात की ओर इशारा कर रहे थे कि भारतीय जनता पार्टी इस देश के संघीय ढांचा पर हमला करना चाहती है, लोकतंत्र पर हमला करना चाहती है वो कहीं ना कहीं चरितार्थ होते हुए दिख रहा है। यह बजट पहली बार ऐसा होगा कि सदन मे विपक्ष की उपस्थिति के बावजूद विपक्ष का नेता नहीं होगा। क्योंकि भाजपा नहीं चाहती है जो स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था है उस व्यवस्था को बनाए रखा जाए। आपको याद होगा पिछले लोकसभा मे अंतिम समय मे विपक्ष जब आवाज उठाता था तो राज्यसभा और लोकसभा मिलाकर लगभग 150 सांसदों को निलंबित करने का काम किया गया। 2-2 लोकसभा सांसदों की सदस्यता छीनी गई। और यहां पर भी जनादेश आ जाने के बावजूद विपक्ष का नेता नहीं बन पाया। हमारे लिए ये कोई गौरव की बात नहीं है जनता ने हमे आशीर्वाद दिया है हम जनता की आकांक्षाओं को पूरा करेंगे। लेकिन संसदीय व्यवस्था में सरकार तभी पूरी होती है जब एक अदद विपक्ष भी साथ होता है। कई कई सरकारी आयोग हैं, समितियां है, नियुक्तियां है, जिसमें विपक्ष के नेता का एक संवैधानिक कर्तव्य है। वो पूरा नहीं हो पा रहा है। इसके जिम्मेवार कौन है ? या तो पूरा का पूरा भाजपा से जीतने वाले विधायक अपना नेता चुन ले नहीं तो सामूहिक इस्तीफा दे दें। क्योंकि रहने का ही कोई सवाल नहीं है। केवल टोका टोकी के लिए कार्य मंत्रणा समिति बनती है, विधानसभा के कार्यक्रम तय होते हैं इसमें नेता विपक्ष नहीं रहता, यह अजीब विडंबना है और इसके पीछे की सोच यही है कि लोकतंत्र को धीरे-धीरे समाप्त करना है। एक दलीय व्यवस्था हो यह भारत का संविधान इसकी इजाजत नहीं देता है। कल जब बजट आएगा उसके बाद देखिएगा सदन के अंदर नहीं बाहर जैसे मकई फूटता है वैसे ही आवाज निकालेगा दो-तीन लोगों का जिसमें प्रदेश अध्यक्ष भी हैं उनके विधायक उनको नेता मानने के लिए तैयार नहीं है अर्जी पे अर्जी डाले जा रहे हैं, केंद्रीय नेतृत्व तैयार नहीं है लेकिन बाहर लावा फूटेगा।कल का 3 मार्च का बजट 3D बजट होगा, श्री डायमेंशनल बजट होगा, एक समृद्धि का होगा, एक खुशहाली का होगा और एक विकसित झारखंड का होगा। रोजगार शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य पर्यटन, मूलभूत बुनियादी सुविधाएं सभी का समावेश होगा। आज भी समय है मैं इसीलिए आज आपसे बात करना चाहता था की दिशा सही नहीं है लोकतंत्र में यह चीज नहीं होनी चाहिए। भाड़े में ही लेकर आईए, असम के मुख्यमंत्री को लेकर आईए, यहां रहे थे ना तीन-चार महीना, तो यहां रहे भाई वह किसी न किसी सदन के तो नेता है वहीं आ जाए। इसलिए मेरा बहुत विनम्र निवेदन है कि कल जब बजट पेश हो उसके पूर्व नेता विपक्ष जरूर वहां पर हो।
झारखण्ड की भागीदारी महज संवाद नहीं, देश के लिए टर्निंग प्वाइंट का संकेत !
रांची :झारखण्ड जैसे राज्य के लिए विश्व आर्थिक मंच में भागीदारी महज वैश्विक संवाद तक सीमित नहीं है बल्कि भारत...












