रांची :झारखंड में रक्त की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए ब्लड सेपरेशन यूनिट के बेहतर संचालन के लिए राज्य सरकार अब नई रणनीति पर काम कर रही है। इसी क्रम में आज अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें ब्लड डोनेशन और कलेक्शन को सुदृढ़ बनाने के लिए एजेंसी हायर करने हेतु आरएफपी (RFP) पर विस्तृत विमर्श किया गया।
बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित एजेंसी राज्यभर में नियमित रूप से ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित करेगी, ब्लड बैंक संचालन में सहयोग करेगी और रक्त संग्रह की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाएगी।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में हर साल लगभग 1.5 से 2 लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, जिसे सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब रिप्लेसमेंट ब्लड की व्यवस्था समाप्त होने के कारण रक्त संग्रह की चुनौती बढ़ गई है और वर्तमान में यह केवल स्वैच्छिक दान और कैंपों के माध्यम से ही संभव हो पा रहा है।
उन्होंने निर्देश दिया कि आवश्यकता पड़ने पर प्रत्येक जिले में ब्लड कलेक्शन के लिए विशेष वाहनों की खरीद, कलेक्शन यूनिट की स्थापना और आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही एजेंसी को कॉलेज, कार्यालय, पंचायत स्तर तक कैंप आयोजित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। अर्धसैनिक बलों जैसे सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों के कैंपों में भी व्यापक स्तर पर रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे।
बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रत्येक कैंप में कम से कम 100 यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य रखा जाएगा, ताकि राज्य में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत करने के लिए अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि रक्त संग्रह के दौरान डोनर की फोटो ली जाए और उसे बारकोड के साथ जोड़ा जाए। साथ ही ब्लड जांच की प्रक्रिया को मशीन से सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने की व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लगाई जा सके। इसके लिए एक समर्पित पोर्टल विकसित करने की आवश्यकता भी जताई गई।
बैठक में सिकल सेल बीमारी पर भी चर्चा हुई और इसे ध्यान में रखते हुए रक्त संग्रह और प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया गया।
इस बैठक में झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी एवं झारखंड स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन, शशि प्रकाश झा, डीआईसी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, संयुक्त निदेशक रीतु सहाय सहित कई चिकित्सक और अधिकारी उपस्थित रहे।
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