रांची :दृढ़ता और उत्कृष्टता की कहानी पिताम्बर अग्रवाल की यात्रा
सफलता इस बात से तय नहीं होती कि कोई कहाँ से शुरू करता है, बल्कि इससे तय होती है कि वह अपनी यात्रा में कितनी मेहनत, समर्पण और धैर्य दिखाता है। पिताम्बर अग्रवाल की कहानी भी ऐसी ही एक प्रेरणादायक दास्तान है, जो यह साबित करती है कि मजबूत इरादों से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।
पिताम्बर का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। उनके माता-पिता — गोपाल अग्रवाल और सबिता देव — ने उनके बेहतर भविष्य के लिए कई त्याग किए। उनके पिता की एक छोटी निजी नौकरी से ही घर का खर्च चलता था, फिर भी शिक्षा का महत्व कभी कम नहीं हुआ। बचपन से ही पिताम्बर में उत्कृष्टता प्राप्त करने की चाह गहराई से समाई हुई थी।
उनकी शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत CCL के CSR योजना ‘CCL के लाल’ (2015-17 बैच) से हुई, जहाँ उन्हें सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के IITian अधिकारियों द्वारा मार्गदर्शन मिला। कड़ी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने कक्षा 10 में 10 CGPA और कक्षा 12 में 96% अंक प्राप्त कर स्कूल टॉपर का खिताब हासिल किया। इंजीनियरिंग के प्रति उनके जुनून ने उन्हें JEE मेन्स और एडवांस्ड परीक्षा में सफलता दिलाई, जिससे वे जादवपुर विश्वविद्यालय में मैकेनिकल इंजीनियरिंग पढ़ने पहुँचे।
2021 में स्नातक करने के बाद पिताम्बर ने डेटा साइंस के क्षेत्र में कदम रखा और Accenture Strategy में डेटा साइंटिस्ट की भूमिका निभाई। पिछले चार वर्षों में उन्होंने उन्नत विश्लेषणात्मक कौशल और समस्याओं के समाधान में विशेषज्ञता हासिल की और व्यवसायों के लिए मूल्यवान इनसाइट्स प्रदान किए।
लेकिन पिताम्बर की महत्वाकांक्षाएं यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने CAT परीक्षा की तैयारी शुरू की और 99.29 परसेंटाइल प्राप्त कर देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में जगह बनाई। इसी दौरान उन्हें SSC CGL 2024 के माध्यम से GST इंस्पेक्टर के रूप में चयनित किया गया। हालांकि यह एक प्रतिष्ठित सरकारी पद था, फिर भी उन्होंने इसे अस्वीकार करते हुए IIM कोलकाता को चुना, यह महसूस करते हुए कि प्रबंधन शिक्षा उनके दीर्घकालिक लक्ष्यों के अधिक अनुकूल है।
पिताम्बर की सफलता की कहानी उनके छोटे भाई आयुष अग्रवाल की उपलब्धियों से और भी प्रेरणादायक बनती है। ‘CCL के लाल’ (2017-19 बैच) के एक और होनहार छात्र आयुष ने BIT सिंदरी से सिविल इंजीनियरिंग (2023 बैच) की पढ़ाई की और अब अडानी में डिप्टी मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं।
पिताम्बर की यात्रा केवल अंकों और उपलब्धियों की नहीं, बल्कि यह एक ऐसी कहानी है जो कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास और शिक्षा की ताकत का प्रमाण है। उनकी लगन और सीखने की ललक ने न केवल उनके जीवन को बदला है, बल्कि ‘CCL के लाल’ और ‘CCL की लाडली’ के वर्तमान छात्रों सहित अनगिनत युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना है।












