झारखंड राज्य, ख़ासकर पूर्वी सिंहभूम जिला में अनेक ऐसे परिवार हैं जिनमें बच्चे अत्यंत विकट एवं जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में जीवन-यापन कर रहे हैं. विभिन्न प्रखंडों में बड़ी संख्या में बच्चे
शिक्षा से वंचित है,
स्कूल ड्राप आउट के शिकार हैं
बाल श्रम में संलग्न हैं,
उपेक्षा हिंसा व असुरक्षा की स्थिति में हैं, हिंसा के मामले में अपराध की जिम्मेदारी सरकार ले
नशा में लिप्त हैं,
बाल विवाह के जोखिम में पाए गए हैं झारखंड का
॰ एकल परिवारों के बच्चे कई प्रकार की समस्याओं से जूझ रहे हैं. मोबाइल की लत एवं सोशल मीडिया का लिए खतरा बनता जा रहा है।
उपर्युक्त चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ग्राम, पंचायत एवं प्रखंड स्तर बच्चों के लिए निम्नांकित कार्य प्रारंभ किए जाने आवश्यक हैं
• बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना
• किशोर-किशोरियों के लिए कौशल विकास गतिविधियाँ
• परिवारों को सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना
• सभी स्तरों—ग्राम, पंचायत, प्रखंड, विद्यालय, आंगनबाड़ी—के हितधारकों का क्षमता विकास
• बाल संरक्षण के लिए स्थायी और प्रभावी तंत्र स्थापित करना
इसके साथ ही, जिला प्रशासन तथा अन्य गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से शेष प्रखंडों में भी ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षा प्रदान करने तथा उन्हें योजनाओं से जोड़ने हेतु निरंतर समन्वय स्थापित किया जाने की ज़रूरत है. उद्देश्य है कि आने वाले समय में पूर्वी सिंहभूम जिला को पूर्ण रूप से “बाल मित्र जिला” के रूप में विकसित किया जा सके।
जिले को बाल मित्र जिला घोषित करने हेतु निम्न मानकों का पालन आवश्यक है:-
. जिले का कोई भी बच्चा बाल श्रम में संलग्न न हो।
. 14 वर्ष से कम आयु का कोई भी बच्चा विद्यालय से बाहर न हो।
. किसी लड़की का विवाह 18 वर्ष से पहले तथा लड़के का विवाह 21 वर्ष से पहले न हो।
. किसी भी परिस्थिति में कोई बच्चा उपेक्षा का शिकार न हो।
. किसी भी बच्चे का मानसिक, सामाजिक या नैतिक शोषण न हो।
. जिला में कोई भी बच्चा बेघर न रहे एवं सभी बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिले।
. इन सभी मानकों को पूरा करते हुए पूर्वी सिंहभूम जिले को “बाल मित्र जिला” घोषित किया जाए.
हम संकल्प लेते हैं कि है कि झारखण्ड को बाल शोषण मुक्त राज्य बनाना है, अतः
. पूर्वी सिंहभूम जिले में चल रहे बाल संरक्षण प्रयासों को आधिकारिक रूप से “बाल मित्र जिला अभियान” का रूप दिया जाए।
. चिन्हित प्रखंडों के साथ शेष सभी प्रखंडों में भी समन्वित मैपिंग, सुरक्षा एवं पुनर्वास की व्यवस्था सुदृढ़ की जाए।
. जिला स्तर पर सभी विभागों के संयुक्त संचालन हेतु बाल मित्र जिला टास्क फोर्स का गठन किया जाए।
. विद्यालय, आंगनबाड़ी, पंचायत, पुलिस, स्वास्थ्य एवं श्रम विभाग के साथ नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए।
. जिला प्रशासन के सहयोग से पूर्वी सिंहभूम जिला आने वाले समय में बच्चों के लिए पूर्णत: सुरक्षित, सहायक एवं विकासोन्मुख वातावरण बनाकर झारखण्ड का पहला मॉडल “बाल मित्र जिला बनाया जा सकेगा।
पूर्वी सिंहभूम” बच्चों के सुरक्षित व उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक कदम साबित हो सकता है, यदि इस जिला में—
बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, किशोर-किशोरियों के कौशल विकास कार्यक्रम चलाने, परिवारों का योजनाओं के लाभ से जोड़ने, ग्राम–पंचायत–प्रखंड स्तर पर क्षमता निर्माण करने तथा बच्चों की सुरक्षा हेतु मजबूत तंत्र क़ायम करने का कार्य तेजी से चलाया जाए.
हमारी अपील है कि झारखंड, ख़ासकर पूर्वी सिंहभूम जिला को पूर्ण रूप से बाल मित्र जिला बनाया जाय और इस हेतु निम्नांकित प्रमुख मानक स्थापित किए जायें ः-
जिले का कोई भी बच्चा बाल श्रम न करे
14 वर्ष से कम आयु का कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे
किसी लड़की का विवाह 18 वर्ष से पहले नहीं
किसी लड़के का विवाह 21 वर्ष से पहले नहीं
किसी भी बच्चे का मानसिक, सामाजिक या नैतिक शोषण न हो। ….. जिला का कोई भी बच्चा बेघर या उपेक्षित न हो
आइए मिलकर प्रयास करें कि पूर्वी सिंहभूम को बाल शोषण-मुक्त बनाकर झारखण्ड का मॉडल “बाल मित्र जिला” बनाया जाए और इसी प्रकार का अभियान पूरे झारखंड में चलाया जाए.
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