रांची : बजट सत्र के 16वें दिन झारखंड विधानसभा में पानी और चापाकलों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। विधायक हेमलाल मुर्मू ने संतालपरगना क्षेत्र, खासकर लिट्टीपाड़ा में चापाकलों की दयनीय स्थिति को सामने रखते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और कई चापाकल काम नहीं कर पा रहे हैं। हेमलाल ने पूछा कि ड्रॉट एरिया में लोगों को पेयजल कैसे उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार का जवाब
सदन में मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में कुल 69,916 चापाकल खराब पड़े हैं, जिनमें से पाकुड़ जिले में 3,446 चापाकल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 44,906 चापाकलों की साधारण मरम्मत के लिए स्वीकृति दे दी गई है। मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि जलस्तर नीचे जा रहा है, लेकिन मरम्मत कार्य जारी हैं।
विपक्ष का तीखा हमला
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मुद्दे पर सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि अब चापाकलों की मरम्मत के लिए केंद्र से फंड मांगने की नौबत आ गई है। बाबूलाल ने इसे झारखंड के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया और चिंता जताई कि पानी जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में सरकार जूझ रही है।
फंड और मरम्मत को लेकर सफाई
विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया कि केंद्र से पैसे मांगने का कोई सवाल नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने चापाकल मरम्मत के लिए फंड जारी कर दिया है और मरम्मत का काम लगातार चल रहा है।
पानी संकट पर चिंता बरकरार
विपक्ष और सरकार के बीच गर्मागर्मी के बावजूद यह मुद्दा साफ करता है कि झारखंड में पानी की कमी गंभीर स्तर पर है और चापाकलों की स्थिति सुधारने के लिए सतत प्रयासों की जरूरत है।
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